हल्द्वानी के ज्योलीकोट क्षेत्र की पांच ग्राम पंचायतों में पिछले दो महीने से पीलिया, बुखार, उल्टी-दस्त से करीब दो सौ लोग बीमार हैं। इस बात से विभाग भी अंजान नहीं है फिर भी हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा है। यह कहना है अपने दो लोगों को इस दूषित पानी की वजह से खो चुके स्थानीय निवासियों का। जल संस्थान की रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट भले ही इस पानी को साफ बता रही हो लेकिन मरीजों की जांच रिपोर्ट इस पानी को दूषित ही बता रहे हैं। उनकी रिपोर्ट में ई-कोलाई मानक से कई गुना ज्यादा दर्शा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, दुर्गापुर पेयजल संयंत्र के ठीक ऊपर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बना है। उसका रिसाव पेयजल लाइन में हो रहा था। 20 जून को ग्रामीणों ने उल्टी-दस्त की शिकायत की थी, विभाग ने अनसुनी कर दी। ग्रामीण अनशन पर बैठे, तब जाकर 27 अगस्त को पुरानी लाइन काटकर दूसरी लाइन जोड़ी गई। यानी 20 जून से 27 अगस्त दो महीने तक लोग वही दूषित पानी पीते रहे। ज्योलीकोट के आसपास करीब दो हजार की आबादी इसी पानी पर निर्भर है।
प्रधान नवल आर्या और उप प्रधान मनोज बरगली का कहना है कि वे लगातार विभाग को बदबू और झाग की शिकायत कर रहे थे, लेकिन विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया। ग्रामीणों की मांग है कि दुर्गापुर पेयजल और मलजल लाइनों को स्थायी रूप से अलग किया जाए, पूरे क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
इधर, जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई का कहना है कि नियमित नमूना जांच हो रही है, लेकिन सवाल यह है कि जब नमूने साफ हैं तो चार अलग-अलग प्रयोगशालाओं में बच्चों से लेकर युवकों तक का यकृत एंजाइम हजारों में कैसे पहुंचा और दो मौतें कैसे हुईं। इसका जवाब किसी क पास नहीं है।
जांच रिपोर्टें क्या कहती हैं
दूसरी रिपोर्ट 28 अगस्त की है। हल्द्वानी के एक नर्सिंग होम में भर्ती 7 वर्षीय बच्चे की जांच पैथकाइंड प्रयोगशाला में हुई। इसमें एसजीओटी 4253 और एसजीपीटी 3194 आया, जो सामान्य से सौ गुना अधिक है। सूजन जांच सीआरपी 25.60 और ईएसआर 18.00 बढ़ा मिला। खून में सोडियम और कैल्शियम कम पाया गया। तीसरी रिपोर्ट 25 अगस्त की है। हल्द्वानी की एक और निजी लैब में हुई 17 वर्षीय किशोरी की रिपोर्ट में कुल पित्त वर्णक 6.32 मिला जबकि सामान्य 1.20 तक है। प्रत्यक्ष पित्त वर्णक 2.51 और एसजीओटी 910, एसजीपीटी 922 मिला। विडाल जांच नकारात्मक आई, यानी टायफाइड नहीं।
चौथी रिपोर्ट 28 अगस्त की है। 26 वर्षीय युवक की अन्य लैब में हुई विस्तृत यकृत जांच में कुल पित्त वर्णक 8.19, प्रत्यक्ष पित्त वर्णक 5.02, एसजीओटी 13328 और एसजीपीटी 9964 मिला जो सामान्य से 380 गुना अधिक है। साथ में एलडीएच 7218 और प्लेटलेट संख्या 1 लाख 30 हजार कम मिली। विडाल जांच फिर नकारात्मक आई।
विश्लेषण से साफ है सिस्टम ने नहीं दिखाई तत्परता
चारों रिपोर्टों में टायफाइड नकारात्मक है, इसलिए बुखार टायफाइड से नहीं है। सभी में यकृत एंजाइम सैकड़ों से हजारों में हैं और पित्त वर्णक 6 से 8 तक है जो तीव्र विषाणुजनित पीलिया का लक्षण है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी माना कि मरीजों में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है। मेडिकल साइंस में ई-कोलाई पॉजीटिव का सीधा मतलब है मल-मूत्र से दूषित पानी पीना। यानी पीलिया-टायफाइड का मुख्य कारण पानी ही है। चिकित्सकों के अनुसार ई-कोलाई जीवाणु का सकारात्मक आना और यकृत एंजाइम का इतना बढ़ना तभी होता है जब मल-मूत्र से दूषित पानी लगातार पिया जाए।
दो की मौत, 200 बीमार, सिस्टम सोया रहा
धान और उपप्रधान ने खोली पोलज्योलीकोट के प्रधान नवल आर्या कहते हैं- हम दो महीने से आवाज उठा रहे हैं कि पानी में बदबू आ रही है, ऊपर सीवर प्लांट का पानी रिस रहा है। जल संस्थान कहता है कि सैंपल ठीक हैं। अगर सैंपल ठीक हैं तो ई-कोलाई पॉजिटिव कैसे आ रहा है। विभाग हमारी बात को गंभीरता से नहीं ले रहा। उप प्रधान मनोज बरगली का आरोप है- विभाग सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। 2000 लोग बीमार हैं, दम तोड़ रहे हैं, लेकिन कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। सीवर और
पेयजल लाइन एक साथ कैसे चल सकती हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले- बीमारी फैलने के बाद भी नहीं चेता विभाग
ज्योलीकोट क्षेत्र में पीलिया, डायरिया समेत जलजनित बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच रविवार को हुई बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने पेयजल व्यवस्था को लेकर विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीमारी फैलने के बाद भी जिम्मेदार विभाग नहीं चेता। ग्रामीणों ने कहा कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराए बिना स्वास्थ्य संकट पर काबू पाना मुश्किल है। साथ ही अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज की जांच कराने की भी मांग उठाई। बैठक में लोगों ने वर्ष 2018 में बनी डाडर-ज्योलीकोट पेयजल परियोजना का मुद्दा भी उठाया। ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना बनने के वर्षों बाद भी ज्योलीकोट क्षेत्र को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने हर पेयजल स्रोत पर माइक्रोफिल्टर लगाने और पानी की नियमित जांच कराने की मांग की।
ब्लॉक प्रमुख ने अधिकारियों को तीन दिन के भीतर ज्योलीकोट तक पेयजल लाइन पहुंचाने के निर्देश दिए। क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और इंटर कॉलेजों में वाटर फिल्टर लगाने के लिए कहा। स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल पहुंचने वाले प्रत्येक मरीज की जांच सुनिश्चित करने, आशाओं व एएनएम को घर-घर भेजकर बीमार लोगों का डाटा जुटाने के निर्देश दिए गए। जरूरतमंदों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि बीमारी के बाद इलाज और उसके कारण को रोकना भी जरूरी है। पेयजल व्यवस्था नहीं सुधरी तो संकट और गहरा सकता है। इस दौरान बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवकी बिष्ट, ग्राम प्रधान नवल कुमार, बबीता मनराल, क्षेत्र पंचायत सदस्य हिमांशु पांडे, मनोज, गीता जोशी, डॉ. हेमंत मर्तोलिया आदि मौजूद रहे।
पीड़ितों का अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराने की मांग
भीमताल ब्लॉक के ज्योलीकोट क्षेत्र में पीलिया, डायरिया समेत जलजनित बीमारियों के बढ़ते प्रकोप से ग्रामीणों में दहशत है। स्थिति को गंभीर बताते हुए ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट ने डीएम को पत्र भेजा है। उन्होंने प्रभावित ग्रामीणों के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में निशुल्क या कम से कम 50 फीसदी छूट पर उपचार और दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने पत्र में प्रथमदृष्टया पेयजल व्यवस्था में विभागीय लापरवाही को भी संकट से जोड़ते हुए जांच की जरूरत बताई।
दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने किया अलर्ट
ज्योलीकोट क्षेत्र में जलजनित बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। विभाग लगातार निगरानी रख रहा है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार अतिरिक्त बेड बढ़ाने के साथ अतिरिक्त डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। ज्योलीकोट में अतिरिक्त स्वास्थ्य दल लगाकर दवाएं बांटी जा रही हैं। लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
सीएमओ ने बताया कि मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल के संचालन का समय भी बढ़ाया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें रोजाना गांवों में घर-घर और फील्ड स्तर पर मरीजों की स्थिति की निगरानी कर रही हैं। अस्पताल में जांच, फ्लूइड और निशुल्क उपचार की व्यवस्था की गई है। आपात स्थिति के लिए 108 एंबुलेंस तैनात है। गंभीर मरीजों के लिए बीडी पांडे अस्पताल, सुशीला तिवारी और बेस अस्पताल हल्द्वानी से समन्वय बनाकर मरीजों को उपचार दिया जा रहा है।
दूषित पानी से होने वाली प्रमुख बीमारियां
- डायरिया और हैजा
- टाइफाइड और पीलिया
- पेचिश (डिसेंट्री) और आंतों के संक्रमण
बचाव के उपाय
- पानी को कम से कम 10 मिनट तक अच्छी तरह उबालकर ही पीने के लिए इस्तेमाल करें।
- क्लोरीनेटेड पानी का ही प्रयोग करें।
- खुले जलस्रोतों (नदियों, झीलों या असुरक्षित स्रोतों) का पानी पीने से बचें।
मुख्य लक्षण
- लगातार बुखार रहना
- उल्टी और दस्त (डायरिया) होना
- जी मिचलाना (उबकाई आना)
- भूख बिल्कुल न लगना