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संक्रमित किडनी को नहीं निकालते तो जा सकती थी मरीज की जान

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। किडनी चोरी के आरोप के मामले में बृहस्पतिवार को अस्पताल पक्ष भी खुलकर सामने आ गया। चिकित्सकों ने आरोप बेबुनियाद बताए और कहा कि महिला रोगी की किडनी में ट्यूमर था और इस वजह से रोगी के परिजनों की सहमति से ही किडनी निकाली गई। उधर, महिला रोगी के पति खीम सिंह ने फिर दोहराया कि किडनी निकालने की बात उन्हें नहीं बताई गई। विवाद बढ़ जाने के बाद अब सरकारी चिकित्सकों की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है और एक सप्ताह में रिपोर्ट आने की संभावना है।
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बुधवार को नैड़ी कुंवाली गांव निवासी खीम सिंह बिष्ट ने शहर के एमएन श्रीवास्तव हास्पिटल पर उपचार के दौरान उनकी पत्नी खष्टी देवी की दाई किडनी निकालने का आरोप लगाया था।

बृहस्पतिवार को हास्पिटल के स्वामी वरिष्ठ सर्जन डा. ओपीएल श्रीवास्तव और डा. रेनु श्रीवास्तव ने प्रेस कांफ्रेंस कर आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि महिला रोगी की किडनी में ट्यूमर था। यदि संक्रमित किडनी को नहीं निकाला जाता तो महिला की जान जा सकती थी। रोगी के रिश्तेदार की सहमति से ही किडनी निकाली गई। डिस्जार्च बुक में भी इसका उल्लेख किया गया है। हिस्टोपैथोलाजी जांच में भी किडनी में ट्यूमर की पुष्टि हुई है।
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संक्रमित किडनी को जांच के लिए आरएमएल लखनऊ स्थित पैथोलाजी भेजा गया था। जिसके बाद मरीज को हायर सेंटर जाने की सलाह दी गई।

मालूम हो कि तहसील के नैड़ी कुंवाली गांव निवासी खीम सिंह बिष्ट ने नगर के एमएन श्रीवास्तव हास्पिटल पर उपचार के दौरान उनकी पत्नी की दाई किडनी निकालने का आरोप लगाया और जिलाधिकारी तथा एसएसपी को शिकायती पत्र भेज न्याय की गुहार लगाई थी। इधर आज डा. ओपीएल श्रीवास्तव और डा. रेनु श्रीवास्तव पत्रकारों से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि बीते मार्च माह में खष्टी देवी को पेट दर्द की शिकायत पर यहां भर्ती किया गया, उनका अल्ट्रासाउंड किया गया।

पेट के निचले हिस्से में मांस का बड़ा गोला था। जिसमें आंतें चिपकी हुई थी। अपेंडिक्स की आशंका क चलते खष्टी का 18 मार्च को आपरेशन किया गया। लेकिन आपरेशन के दौरान दाई किडनी में ट्यूमर का पता चला। इसकी जानकारी मरीज के रिश्तेदार को दे दी गई थी। रिश्तेदार की सहमति पर ही संक्रमित किडनी निकाली गई। खष्टी देवी एनीमिया रोग से ग्रसित थी, उसकी जान बचाने के लिए उसे तीन यूनिट खून भी चढ़ाया गया। किडनी निकालने के बाद मरीज के रिश्तेदार ने उसे लिखित पर रिसीव भी किया। आपरेशन के बाद डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में भी किडनी निकालने का जिक्र किया गया है।
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