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नशा न करें साथियों को भी बचाएं

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पुलिस की पाठशाला में उपस्थित छात्र-छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। अब नशे के तस्कर अपने धंधे के लिए स्कूली बच्चों को निशाना बना रहे हैं। फायदे का सब्जबाग दिखाकर तस्कर पहले बच्चों को फ्री में नशा कराते हैं। नशेड़ी होने पर उनसे स्मैक, हेरोइन बिकवाते हैं। इससे बच्चे अपराधी बन जाते हैं। समाज को बर्बाद कर तस्कर मालामाल हो जाते हैं। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा स्कॉलर एकेडमी होम में आयोजित पुलिस पाठशाला के दौरान एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव ने छात्रों को यह बात बताई।
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एसपी का कहना था कि बच्चों को नशेड़ी बनाने के पीछे तस्करों की साजिश होती है। बच्चों को किसी दबाव में झुकना नहीं चाहिए। नशे के लिए नो, कहना सीखना होगा। स्कूली बच्चों, नौजवानों को नशे का आदी बनाने वाले तस्कर गैर प्रांतों में बैठकर अपना धंधा चलाते हैं। पुलिस ने काफी संख्या में नशा बेचने वालों को जेल भेजा है लेकिन बड़े तस्कर हाथ नहीं लग रहे हैं।

नशा के शिकार युवक समाज से कट जाते हैं। वह एकांत में रहना पसंद करते हैं। पहले नशे के लिए घर, पड़ोस में चोरी करते हैं। नशेड़ी का अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है। गाड़ी चलाते समय वह कहीं भी टकरा सकता है। किसी से झगड़ा कर सकता है। पढ़ाई के काबिल नहीं रह जाता है। इसी प्रकार एक युवक समाज में नाम कमाने की बजाय भविष्य बर्बाद कर देता है। छात्रों को खुद नशे से दूर रहना चाहिए। यदि कोई साथी नशे की गिरफ्त में आया है तो इसकी जानकारी अपने, उसके अभिभावकों, शिक्षकों या पुलिस को देनी चाहिए। पुलिस ने काउंसलिंग कर कई युवकों को समाज की मुख्य धारा में वापस किया है।
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नब्बे फीसद हादसों के पीछे चालकों की लापरवाही
एसपी सिटी ने कहा कि पुलिस हादसों को कम करने के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान लोगों को जागरूक करने की कोशिश कर रही है लेकिन अधिकतर घटनाएं चालकों की लापरवाही से होती हैं। हाल में नैनीताल, रामनगर मार्ग पर हुई दुर्घटनाओं का जिक्र किया। बताया कि चौड़ी सड़क पर चालक ने झपकी ली। परिणाम यह हुआ कि रामनगर में चार यात्रियों की मौत हो गई। इसी कारण चालकों को गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात नहीं करनी चाहिए। नींद आए तो गाड़ी रोककर आराम करना चाहिए। बच्चे भी कार में बैठते हैं। इस कारण उनको गाड़ी चलाने वाले को टोक देना चाहिए। उन्होंने यातायात के तीन संकेतक बताए। शुभ्रा डोभाल ने संचालन किया। इस दौरान प्राचार्या प्रसून भट्ट, प्रबंधक केके भट्ट मौजूद रहे।

छात्रों की अनुरोध पर कॉलेज के प्रबंधक केके भट्ट ने करियर अच्छा बनाने के लिए सवाल किए। एसपी सिटी ने कहा कि छात्रों को सरकारी नौकरी के लिए अपनी मनपसंद विषय का चयन करना चाहिए। कम पैसे में प्रतियोगिता के माध्यम से सरकारी नौकरी हासिल की जाती है। यदि छात्र मेडिकल या इंजीनियरिंग में जाना चाहता है तो उसे भी तैयारी करनी होगी। ध्यान रहे कि सरकारी नौकरी में भ्रष्टता से दूर रहना चाहिए। पुलिस विभाग में नौकरी के लिए अनुशासन जरूरी है। प्रतियोगिता प्रत्येक नौकरी के लिए है।

छात्रों के सवाल, एसपी सिटी के जवाब

सूरज सिजवाली - यदि मेरा दोस्त नशा करता है तो उसे कैसे परखेंगे।
एसपी सिटी - नशेड़ी की नाक बहती है, एकांत में रहने लगता है। नशा करने के बाद अधिक सोते हैं।

अदिति कश्यप- नशे के आदती युवक को समाज की मुख्य धारा में कैसे लाया जा सकता है।
एसपी सिटी - नशेड़ी को आउट डोर खेल के प्रति प्रेरित करना चाहिए। यदि नशे का आदी संकल्प ले तो उसे नशा छुड़ाया जाना संभव है।

कनिका तिवारी- लोगों से किस प्रकार नशा छुड़ाया जाता है।
एसपी सिटी - संकल्प शक्ति लेने पर युवक को नशा छुड़ाने वाले अस्पताल में रखा जाएगा। काउंसलिंग के माध्यम से युवक को नशे से दूर किया जा सकता है।

सारिका चौहान - नशे के तस्करों को कैसे भगाया जा सकता है।
एसपी सिटी - यदि लोग सूचना देते हैं तो पुलिस ऐसे लोगों को जेल के अंदर भेज सकती है।

शिक्षिका शुभ्रा- आईटी कैंपस, हॉस्टल में रहने वाले छात्र भी नशे के शिकार हो जाते हैं।
एसपी सिटी - समाज से आईटी, मैनेजमेंट के छात्र अलग नहीं होते हैं। हॉस्टल के डार्क रूम में छात्र नशे का सेवन करते हैं। उनको पता नहीं कि नशे के तस्कर काले धन के लिए काम करते हैं। नशे की गिरफ्त में आने पर छात्रों का करियर बर्बाद हो जाता है।
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पहले बच्चों को फ्री में नशा कराते हैं तस्कर, फिर कराते हैं तस्करी
एसपी ने स्कॉलर एकेडमी होम में छात्रों के सवालों से हुए रूबरू
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