हल्द्वानी। ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त आह्वान पर राष्ट्रीय हड़ताल के दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों पर ‘कामगार’ (प्रधानमंत्री) ने प्रहार किया है। बैंकों में हड़ताल के कारण लगभग 175 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।
मंगलवार को बुद्ध पार्क में सभा को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया सेंट्रल कॉउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा बहुगुणा ने कहा कि खुद को कामगार कहने वाले प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने के बाद पूंजीपतियों के हितों के पक्ष में श्रमिकों के अधिकारों पर लगातार हमला किया है। एक सर्वे के मुताबिक सिर्फ 2018 में 1 करोड़ 8 लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने कहा किए मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आते ही सबसे पहले किसानों पर भूमि अधिग्रहण कानून लाई। इसके बाद मजदूरों के ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमला बोल अपनी घोर किसान मजदूर विरोधी मंशा को उजागर कर दिया।
बैंक कर्मचारी यूनियन नेता केएन शर्मा, बीमा कर्मचारी संघ के सर्किल अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता, पीएनबी यूनियन के जिला मंत्री योगेश पंत, एनसी खुल्बे, कैलाश पांडे ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण बीमा और बैंकिंग सेक्टर बदहाली के कगार पर पहुंच गया है। इस दौरान उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की रीना बाला, रेश्मा और प्रीति रावत, एमआर मेडिकल यूनियन के महामंत्री जेएस रौतेला, पुष्कर सिंह बिष्ट, पारस तनेजा, रजनी जोशी, बहादुर सिंह जंगी, डीके पांडे, रमेश चंद्र त्रिपाठी, नवीन कांडपाल, कमल जोशी, पुष्पा, तुलसी आर्य, बबीता आर्य, जीवंती, सरोज रावत, पूनम बोरा, कमला, लीला परिहार आदि थीं।
बैंक कर्मियों ने हड़ताल कर केंद्र को ललकारा
कहा, श्रमिकों के हितों पर ‘कामगार’ ने किया प्रहार, 175 करोड़ का कारोबार प्रभावित
बैंक कर्मियों की प्रमुख मांगें
= तीन बैंकों के मर्जर को वापस लिया जाए।
= अन्य बैंकों का विलय कर बड़ा बैंक बनाने का विरोध।
= एनपीए वसूली के लिए कड़े कानून लाए जाएं और बैंकों का ऋण न चुकाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। जबकि एनपीए वसूली के लिए कड़े कानून लाने और बैंक का ऋण न चुकाने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी मांग है।
= 11वां वेतन का समझौते को लागू किया जाए।
= बैंकों में अधिकारियों और कर्मियों की कमी को देखते हुए भर्ती की जाए।
ये है प्रमुख मांगें
= न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये मासिक हो।
= सभी को 5 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दो।
= श्रम कानूनों में मालिकपरस्त बदलाव रद्द करो।
= महंगाई पर रोक लगाओ।
= सभी को सस्ता राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास उपलब्ध कराओ।
= आउटसोर्स और ठेका प्रथा बंद करो।
= कच्चे कर्मियों और मजदूरों को पक्का करो।
= पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करो।
= समान काम, समान वेतन लागू करो।
= सभी खाली पदों पर स्थायी भर्ती करो।
= रोडवेज, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा, जनस्वास्थ्य आदि सेवाओं सहित सरकारी विभागों का निजीकरण बंद करो।
= आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील सहित सभी स्कीम वर्करों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दो।
= निर्माण मजदूरों का पंजीकरण और हित लाभ सरल करो।
= खेत मजदूरों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को समुचित सामाजिक सुरक्षा प्रदान करो।
= बैंकिंग, बीमा, रेलवे, रक्षा और कोयला आदि में एफडीआई एवं निजीकरण पर रोक लगे।
= बोनस और प्रोविडेंट फंड के भुगतान और पात्रता पर लगी सभी सीमा बंदियों को हटाओ और ग्रेच्युटी की राशि बढ़ाओ।
= मनरेगा में वर्ष भर काम और प्रतिदिन छह सौ रुपये दिहाड़ी दो।
= किसानों को फसलों के लाभकारी मूल्य दो और मजदूरों-किसानों का कर्ज माफ करो।
= सभी मजदूरों-कर्मचारियों को ईएसआई, पीएफ और पेंशन की सुविधा दो।
= ट्रेड यूनियन आंदोलन का दमन बंद करो और झूठे मुकदमे वापस लो।
= नौकरी से निकाल गए कर्मियों को बहाल करो।
= रोडवेज हड़ताल में रोडवेज एवं अन्य विभागों के कर्मियों और आमजन पर लगाए झूठे मुकदमे वापस करो।
रामनगर में डेढ़ करोड़ का कारोबार प्रभावित
रामनगर (नैनीताल)। बैंक एवं बीमा कर्मियों की हड़ताल से रामनगर में करीब डेढ़ करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ। कर्मियों ने दिनभर नारेबाजी की और जो बैंक खुले थे उन्हें भी बंद कराया। वहीं मजदूर संगठनों ने भी हड़ताल को समर्थन देते हुए पैंठपड़ाव में जनसभा की। इस दौरान नवेंदु मठपाल, प्रभात ध्यानी, मुनीष कुमार, गिरीश आर्य, ललित उप्रेती, आनंद नेगी, सरस्वती जोशी, राज पांडे, पंकज कुमार, मनमोहन अग्रवाल, ललिता छिम्वाल, किशन शर्मा, मदन कुमार आदि थे। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम की रामनगर शाखा के कर्मियों ने मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। गेट पर कामरेड पीडी जोशी की अध्यक्षता और कामरेड विजय गोस्वामी के संचालन में हुई बैठक में शोभित टंडन, बीसी पपनोई, आरपी पांडे, शिवराज सिंह, शारदा, अमित, नारायण गिरी, पुष्पा, आंचल आदि थे।
बैंकों में रोजाना करीब एक करोड़ के आसपास का कारोबार होता है, लेकिन हड़ताल की वजह से कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। -चित्रलेखा, लीड बैंक मैनेजर, रामनगर
प्रभावित हुआ टीकाकरण
हल्द्वानी। आशाओं के हड़ताल पर रहने के कारण आज टीकाकरण का काम प्रभावित हुआ। महिला अस्पताल में अब सोमवार को छोड़कर सभी दिनों में बच्चों को टीके लगते हैं। प्रतिदिन लगभग 60 से 70 बच्चों का टीकाकरण होता है। आज 30 से 35 बच्चों को ही टीकाकरण हुआ।
डाक कर्मी भी हड़ताल पर रहे
हल्द्वानी। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के दो दिवसीय आंदोलन के आह्वान पर डाक कर्मी भी हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते लेनदेन समेत सभी जरूरी डाक सेवाएं ठप रहीं। डाक कर्मियों ने प्रधान डाकघर में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने बुद्ध पार्क तक जुलूस निकाला। इस मौके पर हुई सभा में अध्यक्ष ललित मोहन जोशी, भूपाल सिंह बिष्ट, सचिव जितेंद्र मर्तोलिया, बाबूराम दिवाकर, विनय ढौंढियाल, प्रदीप उप्रेती, ललिता नैनवाल, चंद्र किरौला, राम सिंह रौतेला, भूपाल सिंह धपोला, इंदर नेगी आदि थे।
न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाए
हल्द्वानी। भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मियों ने तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एआईआईई के आह्वान पर हड़ताल पर रहे। कर्मियों ने न्यूनतम मासिक वेतन 18 हजार करने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और श्रम कानूनों में पूंजीपरस्त संशोधनों के खिलाफ प्रदर्शन कर नारेबाजी की। कर्मियों ने मांगों के समर्थन में वाहन जुलूस निकाला और बुद्ध पार्क में चल रहे संयुक्त ट्रेड यूनियन के आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान केवल भट्ट, भानु उपाध्याय, अशोक कश्यप, लीलाधर जोशी, जेपी पंत, भूपेश जोशी, मनोज गुप्ता, हिमांशु चौधरी, मधु, चित्रा लसपाल, गीता गुर्रानी, पूनम दुबे, तुहिन आदि थे।
विद्युत संशोधन बिल 2018 का विरोध
हल्द्वानी। विद्युत संशोधन बिल 2018 नेशनल टैरिफ पॉलिसी के जनविरोधी प्रावधानों का विरोध करते हुए पावर कारपोरेशन के अधिकारियों ने ध्यानाकर्षण आंदोलन किया। साथ ही मुख्य अभियंता कुमाऊं अतुल सिंह गर्ब्याल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में अधीक्षण अभियंता शेखर त्रिपाठी, अधीक्षण अभियंता नवीन मिश्रा, नवीन टोलिया, अधिशासी अभियंता अमित आनंद, डीएस बिष्ट, डीके जोशी आदि थे।
यह हैं बिजली कर्मियों की प्रमुख मांगें
= तीन विद्युत निगमों का एकीकरण कर उत्तराखंड राज्य विद्युत परिषद का पुनर्गठन किया जाए।
= तीनों विद्युत निगमों में अनुमन्य भत्तों का पुनरीक्षण किया जाए।
= वर्ष 2000 के बाद भर्ती कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए।
= तीनों विद्युत निगमों में कार्यरत कार्मिकों के लिए 9, 14 और 19 वर्ष की सेवा पर अनुमन्य एसीपी/समयबद्ध वेतनमान की पूर्ण व्यवस्था को बहाल किया जाए आदि।
नैनीताल में भी प्रदर्शन
नैनीताल। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन और भोजन माता यूनियन से जुड़ी महिलाएं मंगलवार को सड़क पर उतर आईं। इन महिलाओं ने तल्लीताल से मल्लीताल रिक्शा स्टैंड तक जुलूस निकाला। इस मौके पर आशा वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल, शांति शर्मा, बसंती बोहरा, विमला उप्रेती, आशा नेगी, कमला आर्या, नीता मेहता, ममता जोशी, लक्ष्मी बिष्ट, भगवती बिष्ट, पूजा बिष्ट, खष्टी डंगवाल आदि थी।
पेयजल निगम कर्मियों ने उठाई एमडी को हटाने की मांग
वेतन की मांग पर दूसरे दिन भी जारी रहा बेमियादी कार्य बहिष्कार
हल्द्वानी। तीन महीने से वेतन नहीं मिलने से खफा पेयजल निगम कर्मचारियों ने मुख्य अभियंता दफ्तर में धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रबंधन पर कर्मचारियों को वेतन देने में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए एमडी हटाओ, जलनिगम बचाओ का नारा लगाया।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन दिलाना प्रबंधन का काम है लेकिन निगम प्रबंधन कर्मचारियों को वेतन दिलाना तो दूर उनके हितों की रक्षा तक नहीं कर पा रहा है। प्रबंध निदेशक कर्मचारियों को उनका हक दिलाने में असमर्थ हो गया है। बीबी पाठक की अध्यक्षता और जिलाध्यक्ष दीपेश स्वार के संचालन में हुई सभा में एससी पंत, प्रेम चंद्र गुणवंत, एचडी पाठक, पूरन सिंह मेहरा, डीसी चंदोला, बीसी जोशी, लता जोशी, हर्षा पांडे, कमला लोहनी, सुरेश चंद्र, संजय चौधरी, दीपा जोशी आदि मौजूद थे।
कुलपति के मनाने पर मान गया कूटा
नैनीताल। कुमाऊं विवि शिक्षक संघ कूटा ने मंगलवार को कुलपति प्रो.डीके नौडियाल के साथ हुई वार्ता के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया है। वहीं 9 जनवरी को प्रस्तावित पूजा-अर्चना और शांति पाठ के कार्यक्रम को भी अग्रिम निर्णय तक स्थगित कर दिया है। महासचिव डॉ.शहराज अली ने बताया कि मंगलवार को कुलपति प्रो.नौडियाल के साथ संघ पदाधिकारियों की वार्ता हुई। बताया कि कुलपति ने शीतावकाश को पूर्व की तहत करने के संबंध में एक सप्ताह में निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। इस दौरान अध्यक्ष प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. अजय अरोड़ा, डॉ. शहराज अली, प्रो. आरपी पंत, प्रो. एलएस लोधियाल आदि थे। ब्यूरो
केवी के रिटायर्ड अफसरों और कर्मियों का प्रदर्शन
पांच सूत्री मांगों को लेकर केंद्रीय विद्यालय परिसर में दिया गया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
हल्द्वानी। केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर मंगलवार को केंद्रीय विद्यालय हल्द्वानी के कार्यालय के सामने धरना देकर प्रदर्शन किया। हल्द्वानी के अलावा टनकपुर, रुद्रपुर और अल्मोड़ा से पहुंचे सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त को संबोधित ज्ञापन प्रभारी प्राचार्य आशा पंत को दिया।
केंद्रीय विद्यालय संगठन सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, टीचर्स एवं इंपलाइज वेलफेयर सोसायटी के बैनर तले मंगलवार को धरना दिया गया। एमएल साह और नरी राम ने कहा कि पांच सूत्री मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा। वर्ष 1994 में सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षक नरीराम को भी एरियर का भुगतान नहीं किया गया है। धरना प्रदर्शन करने वालों में वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त महेश लाल साह, सेवानिवृत्त प्राचार्य केएस खाती, एससी कपिल, एचसी मिश्रा, कोषाध्यक्ष आरसीएस धपोला, संयुक्त सचिव एनएस भैसोड़ा, सचिव हेमंत त्रिपाठी, जीवन चंद्र जोशी, सेवानिवृत्त शिक्षक जानकी खर्कवाल, जानकी जोशी, नरीराम, ज्योति जोशी, सुमन बुधलाकोटी, रश्मि जोशी, केवी कांडपाल, आरडी जोशी, चंद्रा जोशी, सेवानिवृत्त लिपिक एमएस रावत आदि शामिल थे।
ये हैं मांगें
- सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार देय वेतन एवं भत्तों की बकाया राशि (36 महीनों) का तुरंत भुगतान किया जाए।
- एफएमए, चिकित्सा भत्ते की बकाया राशि का भुगतान किया जाए।
- सातवें वेतन आयोग के अनुसार राशिकरण एवं ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए।
- सेवा निवृत्त कर्मचारियों के लिए सीजीएचएस सुविधाओं को लागू किया जाए।
- सीपीएफ के जीपीएफ में परिवर्तन किया जाए।