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रूसा में डीपीआर पर डीपीआर का खेल, काम नहीं धेले का

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हल्द्वानी। प्रदेश में उच्चशिक्षा को पटरी पर लाने और गुणवत्तापरक उच्चशिक्षा की योजनाएं तो कई बनीं मगर अब तक कोई परवान नहीं चढ़ सकी हैं। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के अंतर्गत भारत सरकार से लगभग 20 करोड़ का बजट मिल चुका है लेकिन इस योजना में चयनित किसी महाविद्यालय में काम कोई शुरू नहीं हो सका है। छह महीने बीतने को हैं लेकिन रूसा और महाविद्यालयों के बीच डीपीआर पर डीपीआर का खेल चल रहा है।
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रूसा की आर्थिक मदद से प्रदेश के 11 महाविद्यालयों में संसाधन बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्य होने हैं। इसमें चयनित कई महाविद्यालयों से डीपीआर कार्यदायी संस्था से दो से तीन बार बनकर रूसा कार्यालय को जा चुकी हैं लेकिन डीपीआर किसी की स्वीकृत नहीं हुई है। उच्चशिक्षामंत्री डॉ. धनसिंह रावत ऐसे पहले मंत्री हैं जिन्होंने प्रदेश का कोई भी महाविद्यालय नहीं छोड़ा जहां का उन्होंने दौरा न किया हो। उन्होंने महाविद्यालयों की दशा सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं भी तैयार कराई मगर धरातल पर अब तक एक भी नहीं उतर सकी है।
रूसा की आर्थिक मदद से महाविद्यालयों में काम कराए जाने थे पर वे भी डीपीआर की वजह से शुरू नहीं हो पा रहे हैं। उच्चशिक्षा मंत्री की महत्वाकांक्षी एडीबी की योजना भी भारत सरकार से अस्वीकृत होने के बाद अब रूसा की मदद ही बची है जिससे महाविद्यालयों का कुछ भला हो पाएगा। रूसा के अंतर्गत 11 महाविद्यालयों के विकास के लिए दो-दो करोड़ के प्रोजेक्ट बनाए गए। इसके लिए प्रथम चरण की वित्तीय स्वीकृति के तहत भारत सरकार से धनराशि भी आ चुकी है। भारत सरकार से मिली राशि में राज्य सरकार को दस प्रतिशत अंशदान दिया जाना है मगर ये राशि भी राज्य सरकार से नहीं मिल सकी है। इधर, डीपीआर तकनीकी सेल द्वारा स्वीकृत किए जाने के बाद शासन से धनराशि उच्चशिक्षा निदेशालय के खाते में जाएगी, उसके बाद संबंधित महाविद्यालयों के लिए अवमुक्त होगी, इसी कार्य में ही कम से कम तीन माह का समय लग जाएगा।
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डीपीआर पर डीपीआर मगर काम धेला भर नहीं
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान में केंद्र से मिला है 20 करोड़, छह माह में डीपीआर ही स्वीकृत नहीं
उच्चशिक्षामंत्री की रूसा की मदद से महाविद्यालयों को सुधारने की योजना भी नहीं हुई पूरी


इन महाविद्यालयों में होना है कार्य
- महिला महाविद्यालय हल्द्वानी
- कोटद्वार महाविद्यालय
- एसजीआरआर कालेज देहरादून
- ऋषिकेश पीजी कालेज
- काशीपुर पीजी महाविद्यालय
- बागेश्वर पीजी महाविद्यालय
- द्वाराहाट महाविद्यालय
- रुद्रपुर पीजी महाविद्यालय
- डाकपत्थर महाविद्यालय
- रामनगर पीजी महाविद्यालय
- लोहाघाट महाविद्यालय

भारत सरकार से ये मिली राशि
- 11 महाविद्यालयों के लिए 9.90 करोड़
- श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के लिए 6.38 करोड़
- किच्छा मॉडल महाविद्यालय के लिए 5.40 करोड़


भारत सरकार से धनराशि मिल चुकी है। चयनित महाविद्यालयों से डीपीआर मांगी गई थीं लेकिन कुछ संशोधन के लिए दोबारा बनाने को कहा गया है। जब तक डीपीआर सही से नहीं आएगी, उसे टीएसी के पास कैसे भेजा जा सकता है। रूसा के तहत काम जल्द से जल्द शुरू कराने की कोशिश है।
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- डॉ. हर्षवंती बिष्ट, नोडल अधिकारी रूसा एवं उपनिदेशक
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