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174 साल से दिलों पर राज कर रहा नैनीताल

Wed, 18 Nov 2015 01:09 AM IST
चंद्रेश पांडे/अमर उजाला, नैनीताल।
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बुधवार को नैनीताल का 174वां जन्म दिवस मनाया जाएगा। 174 साल पहले जब 18 नवंबर को अंग्रेज व्यापारी पी बैनर के कदम सरोवर नगरी में पड़े होंगे, तब यहां झील और उसके चारों ओर घनघोर पहाड़ियों के अलावा संभवत: इक्का-दुक्का मकान ही रहे होंगे, लेकिन समय के साथ हरे-भरे जंगलों के स्थान पर कंक्रीट के जंगल नजर आने लगे।
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 हालांकि नैनीताल अब कंक्रीट के जंगलों का बोझ सहने की स्थिति में नहीं है, लेकिन इसके सौंदर्य में कोई कमी नहीं आई। यह लगातार देश-विदेश के पर्यटकों के दिल पर राज कर रहा है। देश की आजादी से पहले यहां की सत्ता लंबे समय तक अंग्रेजों के पास रही।

शहर में बसासत शुरू हुई तो ब्रिटिश हुक्मरानों ने दूरगामी परिणामों के मद्देनजर सुरक्षित स्थानों पर आवासीय भवन बनाए। वर्ष 1880 में मल्लीताल स्थित सात नंबर क्षेत्र में हुए भूस्खलन और उससे हुई जनहानि को देखते हुए अंग्रेज अफसरों ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था को चाक-चौबंद किया और झील के इर्दगिर्द पहाड़ियों पर छोटे-बड़े नालों का जाल बिछाया ताकि बरसात का पानी सुरक्षित पहाड़ियों से होकर झील में जा सके।
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 पहाड़ियों पर बने 54 नालों में पूर्व के वर्षों में तेजी से अतिक्रमण बढ़ा, जिसे उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद साल भर पहले जिला प्रशासन ने नालों को न केवल अतिक्रमण मुक्त कराया बल्कि नालों से होकर गुजर रही पेयजल लाइनों को भी हटवा दिया।

अंग्रेजों ने सरोवर नगरी की नगर पालिका के बायलॉज को इस तरह से तैयार किया था कि सरोवर नगरी का पुरातन अस्तित्व बना रहे, लेकिन पिछले वर्षों के दौरान बाइलॉज का पालन सुविधानुसार होता रहा है। वर्ष 1970 के बाद शहर में हुए विकास का नतीजा यह रहा कि समूची सरोवर नगरी कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो गई।

 इससे न केवल पहाड़ियों का नैसर्गिक सौंदर्य प्रभावित हुआ बल्कि झील भी प्रदूषित हुई है। सरोवर नगरी में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों को देखते हुए कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल में निर्माण कार्यों पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी लेकिन बाद में भवन निर्माण संबंधी नियम कानूनों में किए गए बदलाव बूढ़े नैनीताल के लिए बड़ी राहत है।

सरोवर नगरी की खोज का श्रेय भले ही अंग्रेज व्यापारी पी बैनर को जाता है, लेकिन वास्तव में उससे पहले ट्रेल के कदम नैनीताल में पड़े थे। तत्कालीन कमिश्नर ट्रेल वर्ष 1823 के करीब नैनीताल पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने इसे जगजाहिर इसलिए नहीं किया कि उन्हें सरोवर नगरी के नैसर्गिक स्वरूप के बिगड़ने का अंदेशा था। दूसरी ओर बैरन ने यहां से लौटते ही कोलकाता में अखबारों में नैनीताल के संबंध में लेख प्रकाशित कराकर वाहवाही लूटी। ट्रेल का अंदेशा सही निकला और बसासत होने के बाद नैनीताल का सौंदर्य लगातार बिगड़ता चला गया।

सरोवर नगरी के 174वें जन्म दिन के मौके पर बुधवार को यहां विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जन्मोत्सव समिति के अध्यक्ष दीपक बिष्ट ने बताया कि आचार्य नरेंद्र देव औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र तल्लीताल में दोपहर दो बजे से सर्वधर्म प्रार्थना सभा, नैनीताल नगर के इतिहास की जानकारी, स्कूली बच्चों के रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जन्मोत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक डा. कपिल जोशी और विशिष्ट अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद होंगी।
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