पतलोट (नैनीताल)। बारिश न होने से पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीण परेशान हैं। आसमान पर टकटकी लगाते धैर्य जवाब दे रहा है। खेतों की दशा देख कुछ नहीं सूझ रहा है क्योंकि फसलों की सिंचाई के लिए वे बारिश पर ही निर्भर रहते हैं। सूखे का आलम यह है कि सर्दी के इस मौसम में जंगल भी धधक रहे हैं। ओखलकांडा के भनपोखरा गांव के लोगों ने इंद्र देव को मनाने के लिए रविवार को सामूहिक रूप से विशेष पूजा अर्चना की। हरीश रुवाली की अगुवाई में लोग गांव की पहाड़ी पर जमा हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ केले के पेड़ का पूजन किया गया। पेड़ को तिलक, चंदन और अक्षत चढ़ाया गया। इसके बाद जल और पंचामृत से अभिषेक किया गया। पुरोहित चंद्र प्रकाश लोहनी ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ हो रहे छेड़छाड़ और अंधाधुंध दोहन ने ऋतु चक्र असंतुलित हो गई है। इस कारण कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि जैसे हालात पैदा हो रहे है इसलिए लोगों को प्रकृति नियमों का पालन कर धरती माता का भक्ति भाव से पूजन करना चाहिए।
बिनवालगांव निवासी कांति बल्लभ पोखरिया और भनपोखरा की आशा देवी का कहना था जानवरों के लिए बोया गया हरा चारा भी नहीं जम पाया है। फूल और फल पहले ही पकने लगे हैं। इस मौके पर लक्ष्मी देवी, मोहन रुवाली, देवी दत्त, आरती, इंद्रा देवी, नंदी देवी, लोकेश फुलारा, कुलदीप रुवाली, आशुतोष, प्रदीप, यमुना, पुष्पा देवी, हीरा देवी, नवीन, दीक्षा आदि मौजूद रहे ।
भीमताल के भीमेश्वर महादेव में जलमग्न होंगे महादेव
हल्द्वानी। भीमताल के लोग अब शिवलिंग को जलमग्न करने की तैयारी में हैं। बारिश की कामना के लिए यह परंपरा भीमेश्वर महादेव मंदिर में कई सालों से निभाई जा रही है। जब-जब लंबे समय तक बारिश नहीं होती तब यहां के लोग मंदिर के गर्भगृह के दो दरवाजों को बंद कर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। यह जलाभिषेक तब तक होता है जब तक शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न न हो जाए। कई घंटों तक महादेव इसी तरह जलमग्न रहते हैं।
विपिन सनवाल के मुताबिक बरसात न होने के कारण सूखे की स्थिति में भीमेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जलाभिषेक के भी अपने विशेष तौर तरीके हैं। जलाभिषेक करने का अधिकार केवल सौन गांव के पलड़िया जाति के लोगों को ही है। जलाभिषेक के दौरान गर्भगृह में स्थित मंदिर के दोनों ओर स्थित दरवाजों पर शिवलिंग की ऊंचाई से अधिक की दीवार ख़ड़ी कर दी जाती है और उसके बाद पलड़िया जाति के लोग बारी-बारी से तालाब से जल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान मंदिर में कीर्तन भजन और हवन यज्ञ के बाद प्रसाद बांटा जाता है। सौन गांव के पलड़िया परिवारों के लोग बताते हैं कि इससे पहले भी कई बार जब सूखे की स्थिति पैदा हुई तब उन्होंने शिवलिंग में जलाभिषेक किया और जलाभिषेक के कुछ घंटों बाद ही बरसात हो गई। पलड़िया परिवार से जुड़े लोगों ने पिछले साल भी भीमेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया था लेकिन तब केवल बूंदाबांदी ही हुई थी।
जलाभिषेक की तारीख अभी तय नहीं की गई लेकिन जल्द ही जलाभिषेक किया जाएगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि उसके बाद अवश्य ही बरसात होगी।
-नरेंद्र गिरी रिंकु मंदिर पुजारी भीमेश्वर महादेव मंदिर भीमताल