रेल के जरिये कर चोरी का माल कुमाऊं में पहुंच रहा है। दो नंबर का गोरख धंधा करने वाली एक कैरियर कंपनी दिल्ली से रेलवे पार्सल के जरिये माल हल्द्वानी पहुंचाती हैं फिर यहां से पर्वतीय जिलों में माल खपा दिया जाता है। सूत्रों की माने तो हर रोज लाखों का माल कर चुकाए बिना ही पहुंचाए जा रहा है। यह गोरखधंधा करने वाली कंपनी रेलवे की पुरानी लीज होल्डर है इसलिए कोई शक भी नहीं करता है। हैरत तो यह है कि राज्य कर अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं है।
ऐसे होता है खेल
कैरियर कंपनी उत्तरी रेलवे में अधिकृत थी। कंपनी ने इसी साल लीज वापस ले ली। अब यह कंपनी माल भेजने वाले कारोबारियों को रेलवे लीज की पुरानी रसीद देती है। लीज के नाम पर कारोबारी से मोटा शुल्क वसूला जाता है जबकि कम दाम में माल को पार्सल से भेज दिया जाता है। यह कंपनी रोजमर्रा की वस्तुओं समेत कपड़ा, जूते तक में कारोबार करती है। हर रोज लाखों करोड़ों का माल भेजने में कंपनी दिन पर दिन मालामाल हो रही है।
सरकारी खजाने को होता है दोहरा नुकसान
वस्तु एवं सेवा कर के मुताबिक ऐसी सर्विस पर 18 फीसदी की दर से कर वसूला जाता है। अब कंपनी माल पहुंचाने की सेवाएं तो मुहैया करा रही हैं लेकिन कर नहीं चुका रही है जिससे रेलवे को हजारों की चपत लगती है। वहीं बिना वस्तु एवं सेवा कर चुकाए माल पहुंचाया जाता है जिससे राज्य सरकार के खजाने में भी जीएसटी जमा नहीं होता है। इस तरह सरकार के खजाने को दोहरा नुकसान होता है।
कोट
पूर्व में भी यह मामला सामने आया था सहायक आयुक्त से जवाब मांगा गया है। मामला बेहद गंभीर है इसकी जांच की जा रही है।
-पीएस डुंगरियाल, संयुक्त आयुक्त प्रवर्तन, राज्य कर हल्द्वानी