हल्द्वानी। दिल्ली से सोमवार सुबह रवाना हुआ कैलाश मानसरोवर यात्रियों का चौथा दल दोपहर में काठगोदाम पहुंचा। जहां केएमवीएन के अधिकारियों, कर्मचारियों ने दल के सदस्यों का स्वागत किया। अल्प विश्राम कर भोजन के बाद दल अल्मोड़ा रवाना हो गया।
पर्यटक आवास गृह पहुंचे दल के लाइजनिंग ऑफीसर (एलओ) रविंद्र रागुत्थाहाली, मुग्धा सेन हैं। दल में कुल 59 तीर्थयात्री शामिल हैं जिनमें 46 पुरुष, 13 महिलाएं हैं। दल में बिहार के दो, दिल्ली के सात, गुजरात के नौ, हरियाणा के दो, हिमाचल प्रदेश का एक, कर्नाटक के चार, मध्य प्रदेश के पांच, महाराष्ट्र के दो, पूना के दो, राजस्थान के 10 यात्री शामिल हैं। दल का स्वागत करने वालों में पर्यटन विकास अधिकारी बीना सुयाल, टीआरसी प्रबंधक रमेश चंद्र पांडे, व्यवसाय विकास अधिकारी दीपक पांडे, गिरधर मनराल आदि थे।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों का चौथा दल अल्मोड़ा पहुंचा
59 यात्रियों के दल में 46 पुरुष और 13 महिलाएं शामिल
वाया लालकुआं होकर पहुंचे दल के यात्री
हल्द्वानी। रुद्रपुर और हल्द्वानी के बीच संजय वन के पास राष्ट्रीय राजमार्ग में पेड़ गिरने की सूचना मिलने पर कैलाश मानसरोवर यात्रियों का दल वाया लालकुआं होकर काठगोदाम पहुंचा। पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक रमेश पांडे ने बताया कि दल के एलओ को संजय वन के पास पेड़ गिरने से सड़क में यातायात बंद होने की सूचना दे दी गई थी। इसके चलते यात्री दल रुद्रपुर से पंतनगर रोड और लालकुआं होते हुए दोपहर 3:20 बजे काठगोदाम पहुंचा।
गुलाब के फूलों से हुआ स्वागत
हल्द्वानी। टीआरसी में कैलाश मानसरोवर यात्रियों का स्वागत गैंदे की फूलों की माला से होता है लेकिन सोमवार सुबह से ही मूसलाधार बारिश के चलते टीआरसी प्रबंधन को गैंदे के फूल की मालाएं नहीं मिल सकीं। इसलिए टीआरसी प्रबंधन ने गुलाब के फूलों से यात्रियों का स्वागत किया।
कैलाश मेरे पिता और मैं उनका बेटा : गौरव
हल्द्वानी। लगातार 11वीं बार कैलाश यात्रा पर जा रहे दिल्ली के डॉ. कैलाशी गौरव अरोरा का कहना है कि कैलाश में विराजे महादेव उनके पिता हैं। वह उनके बेटे हैं। बेटा हर बार साल में एक बार पिता से मिलने जाता है। अरोरा वर्ष 2008 से लगातार यात्रा पर जा रहे हैं। इसमें तीन बार वह नेपाल के रास्ते कैलाश यात्रा पूरी कर चुके हैं।