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उच्चशिक्षा: दुर्गम से बचने को बन गए विकलांग

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हल्द्वानी। उच्चशिक्षा के हाल भी अजब गजब हैं। पिछले साल से प्रेरणा लेते हुए इस बार बहुत से प्राध्यापक मेडिकल आधार बनाकर सुगम में जमे रहने की जुगत भिड़ा रहे हैं। पिछले वर्ष भी कई को नियम विरुद्ध मेडिकल का लाभ दिए जाने से और वास्तविक बीमार को किसी न किसी बहाने दुर्गम में भेजे जाने से वास्तविक बीमार प्राध्यापक परेशान हैं। उच्चशिक्षा विभाग का हाल यह है कि दुर्गम की सेवा करने से बचने के लिए प्राध्यापक गंभीर रूप से बीमार ही नहीं बल्कि खुद को विकलांग तक दर्शा दे रहे हैं। वहीं, उच्चशिक्षा निदेशालय में सेवा इतिहास दर्ज करने में खामियों की वजह से दूर दराज के प्राध्यापक काफी परेशान हैं। सेवा इतिहास सही करने के लिए रोजाना उच्चशिक्षा निदेशक के पास प्रार्थना पत्र आ रहे हैं।
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अनफिट को दिया जाए वीआरएस
हल्द्वानी। महाविद्यालयों से जुड़े लोगों का कहना है कि सेवा के लिए अनफि ट को न जाने किन कारणों से सुगम में रखा जा रहा है जबकि वास्तविक रूप में लाभ के अधिकार वालों को वंचित किया जा रहा है। उनका कहना है कि जो अनफि ट हैं उन्हें अनिवार्य रूप से वीआरएस दे दिया जाए।

दुर्गम से बचने को बन गए ‘विकलांग’
उच्चशिक्षा निदेशालय में सेवा इतिहास दर्ज करने में खामियों से कई प्राध्यापक परेशान


एक प्राध्यापिका जिनका इतिहास 21 साल से सुगम का है । सभी वित्तीय लाभ के पद में आगे लेकिन खुद को विकलांग दर्शा कर पिछले वर्ष भी लाभ लिया।

एक प्राध्यापिका ने खुद को सिजोफ्रे निया नामक बीमारी का गंभीर रोगी बताते हुए दुर्गम से छूट एवं निदेशालय में नियुक्ति मांगी है।

एक प्राध्यापिका ने स्पॉन्डिलाइटिस को गंभीर श्रेणी में दर्शाकर दुर्गम से छूट की मांग की है।

एक प्राध्यापिका ने अपने पति के कई रोगों को गंभीर श्रेणी का दर्शाकर दुर्गम से छूट मांगी है।

एक अधिकारी ने अपनी पत्नी को गंभीर रोगी बताया है। दुर्गम में सेवा अवधि भी गलत दर्शायी है जबकि पत्नी नौकरी कर रही है। पति दूसरे शहर में कार्यरत पत्नी की सेवा और देखभाल हल्द्वानी में रहते करना चाहते है।
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