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पहाड़ के कालेज में तैनाती का नंबर आया तो हो गए बीमार

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हल्द्वानी। उच्चशिक्षा निदेशालय में महाविद्यालयों के प्राध्यापकों और प्राचार्यों के अनिवार्य स्थानांतरण की तैयारी अंतिम चरण में चल रही है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में डेढ़ दशक से डटे प्राध्यापकों का पहाड़ चढ़ने का नंबर आया तो अब वे बीमार होने लगे हैं। कोई प्राध्यापक अपनी बीमारी के कागज लगा रहा है तो कोई अपनी पत्नी की बीमारी का मेडिकल लगाकर अनिवार्य स्थानांतरण से बचने की कोशिश में लगा है। इस तरह अब तक 12 से अधिक प्राध्यापक मेडिकल लगा चुके हैं। इसके अलावा वेबसाइट में प्राध्यापकों और प्राचार्यों के दर्शाए गए सेवा इतिहास में खामियों से कई लोग परेशान हैं।
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विभाग के एक पीड़ित प्राध्यापक ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि स्थानांतरण के सेवा इतिहास तैयार करने में लगे प्राध्यापक द्वारा अन्य प्राध्यापकों के रिकार्ड में कुछ फेरबदल इसलिए करने की कोशिश की गई ताकि वो खुद पहाड़ चढ़ने से बच सकें। क्योंकि ये प्राध्यापक आज तक दुर्गम नहीं गए और लगातार एमबीपीजी कॉलेज में जमे हैं। निदेशालय में चर्चा तो यहां तक है कि मेडिकल प्रमाणपत्र को लेकर भी मनमानी जैसी चल रही है जिसकी जुगाड़ है उसे इसका लाभ दिया जा रहा है जबकि वास्तविक बीमार को किसी न किसी बहाने लटकाया जा रहा है। विधवा और विधुर को लेकर भी असंतोष है। एक्ट में उन्हें दुर्गम से छूट दी गयी है जबकि विभाग द्वारा सुगम के एक ही कॉलेज में 20 साल से अधिक जमी हैं। नियमानुसार उन्हें सुगम के किसी अन्य कॉलेज कुमाऊं से गढ़वाल या गढ़वाल से कुमाऊं में भेजा जाना चाहिए। तभी इनकी राजनीति कॉलेज से खत्म हो सकती है। राजकीय सेवा में कार्यरत पति- पत्नी को छूट है लेकिन इस छूट का लाभ चहेतों को बिना राजकीय सेवा के भी दिया जा रहा
है। एमबीपीजी कालेज की प्राध्यापिका ने मेडिकल का सहारा लेकर अनिवार्य तबादले में छूट मांगी है जबकि यह महिला प्राध्यापिका लंबे समय से यहीं जमी हैं।


पहाड़ के कॉलेज में तैनाती का नंबर आया तो हो गए ‘बीमार’
कई प्राध्यापकों ने मेडिकल लगाकर अनिवार्य स्थानांतरण से मांगी राहत


निदेशालय में मांगी तैनाती
जैंती में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपा मखोलिया ने बीमारी के चलते अपनी तैनाती उच्चशिक्षा निदेशालय में किए जाने का अनुरोध किया है।

प्राचार्य ने हल्द्वानी के पास मांगी तैनाती
सोमेश्वर कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अर्चना साह ने अपनी सेवा के 13 वर्ष 4 माह 21 दिन दुर्गम महाविद्यालय में पूरी करने एवं 63 वर्ष 10 माह की आयु होने का हवाला देते हुए अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण हल्द्वानी के आसपास मांगा है।
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