नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग, उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ, महादेवी वर्मा सृजनपीठ उमागढ़ रामगढ़ के सहयोग से बृहस्पतिवार से हरमिटेज सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। इसका विषयहिंदी भक्तिकाव्य के सामाजिक सरोकार है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. गोपेश्वर सिंह संगोष्ठी के मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि भाषाएं भले ही अलग रही हों लेकिन भक्ति साहित्य का उद्देश्य सत्य ही रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी भक्ति साहित्य से प्रेरित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल ने आज के अखंड भारत की संकल्पना को भक्तिकालीन आंदोलन से जोड़ा। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ के अध्यक्ष डॉ. राजनारायण शुक्ला ने भक्तिकाल की प्रासंगिकता, मानवमूल्य, भक्ति-आंदोलन को राष्ट्रीय जागरण से जोड़कर जन-जन तक पहुंचाने वाला आंदोलन बताया। उन्होंने आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं, लोकबोलियों को एक मंच पर लाने में उत्तर प्रदेश के भाषा संस्थान लखनऊ का योगदान बताया।
सृजन पीठ के निदेशक प्रो. डीएस पोखरिया ने भक्तिकाल के पुनराख्यान, पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता, प्रासंगिकता, उपयोगिता बताई। कुमाऊं विवि डीएसबी परिसर के हिंदी विभाग के अध्यक्ष, संगोष्ठी के मुख्य संयोजक प्रो. मानवेंद्र पाठक ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. नीरजा टंडन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी के द्वितीय बौद्धिक सत्र में 10 से अधिक शोध पत्र पढ़े गए। कुमार गंधर्व की शिष्य परंपरा के प्रमुख गायक रवि जोशी ने मनमोहक प्रस्तुति दी। अमित की ओर से संपादित, जावेद अली, डॉ. अर्जिता सिंह, शालिनी नागर के सहयोग से लिखी गई पुस्तक मध्यकालीन साहित्य विचार विमर्श का विमोचन भी किया गया। संगीत विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. रवि जोशी के नेतृत्व में जया भट्ट, खुशी सहदेव, करन बिष्ट, लोकेश जोशी ने सरस्वती वंदना, कुलगीत गया। हिंदी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. चंद्रकला रावत, महादेवी वर्मा सृजन पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने संचालन किया। संगोष्ठी में प्रो. शिरीष कुमार मौर्य, प्रो. निर्मला ढैला बोरा, डॉ. शुभा मटियानी, डॉ. शशि पांडेय, कुसुमलता, प्रो. उमा भट्ट, प्रो. मधु नयाल, डॉ. तेजपाल सिंह, डॉ. माया गोला, डॉ. ममता पंत, प्रो. बीएल साह, प्रो. अतुल जोशी, कुमाऊं विवि कार्य परिषद सदस्य जगदीश बुधानी, विधान चौधरी, डॉ. ओपी सैनी आदि थे।
नैनीताल में हिंदी भक्तिकाव्य के सामाजिक सरोकर विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू