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उतराखंड के भटके पुरुषों को महिलाएं ला सकती हैं लाइन पर: प्रसून जोशी।

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नैनीताल। प्रसिद्ध गीतकार और सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कुमाऊं विवि के 15वें दीक्षांत समारोह के दौरान अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं ने सफलता की अनोखी इबारत लिखी है। यहां महिलाएं पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर हैं। दूसरे प्रदेशों और विश्व के कुछ हिस्सों को उत्तराखंड से महिला सशक्तीकरण पर सीख लेने की जरूरत है। जिस तरह की शक्तिशाली और जुझारू महिलाएं प्रदेश में देखने को मिलती हैं वैसी महिलाएं कहीं भी नहीं देखी जातीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं ही भटके पुरुषों को रास्ते पर ला सकती हैं। उन्होंने महिलाओं पर कविता सुनाते हुए कहा कि सने हाथ माटी की खुुशबू लिए, रची धूप माथे पर बूंदे लिए, जाने कितने बाजू तू बांहों में लिए, कितनी राहत तू अपनी छाहों में लिए।
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कहा पहाड़ का आदमी निश्छल और विनम्र होता है। जब यहां का व्यक्ति निकल कर बड़े शहरों में पहुंचता है तो उसे छल का पता चलता है। कुविवि की ओर से दिए गए सम्मान को उन्होंने भावनाओं से जुड़ा सम्मान बताया। बताया कि उनका बचपन अल्मोड़ा में वन और नदियों के इर्द-गिर्द बीता है। कुमाऊंनी भाषा उनकी धमनियों में दौड़ती है। भाषा सभी की मां होती है। छात्र-छात्राओं के सीखने का सिलसिला हमेशा चलता रहता है। विद्यार्थियों को कभी भी अपनी प्रैक्टिस बंद नहीं करनी चाहिए।
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महिला सशक्तीकरण पर उत्तराखंड से सीख लें दूसरे राज्य : प्रसून जोशी
उत्तराखंड के भटके पुरुषों को महिलाएं ला सकती हैं लाइन पर
दीक्षांत समारोह में सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष ने दिया संदेश
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