रामनगर (नैनीताल)। तराई पश्चिमी वन प्रभाग में बाघों की गणना का कार्य बुधवार से शुरू हो गया है। एक माह तक होने वाली गणना के बाद संभावना जताई जा रही है कि यहां पर बाघों की संख्या बढ़ सकती है। चार साल बाद हो रही गणना में डब्लूआईआई की टीम भी जुटी है। 101 ग्रिडों पर 150 कैमरों से बाघों की गणना की जाएगी।
4500 हेक्टेअर में फैला तराई वन प्रभाग में साल 2014 में हुई गणना में 32 बाघ थे। इन चार सालों में बाघ मरने की कोई घटना नहीं हुई, इससे साफ है कि इस बार बाघों की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। इसके मद्देनजर डब्लूआईआई और तराई वन प्रभाग की संयुक्त टीम एक नवंबर से गणना शुरू कर रही है।
इसके लिए पूरे तराई वन प्रभाग को 101 ग्रिड में बांटा गया है। इन ग्रिडों को दो स्क्वायर किलोमीटर के तहत बांटते हुए उनमें 150 कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे है।
तराई वन प्रभाग के डीएफओ डीके सिंह ने बताया कि फरवरी-मार्च में एसआईजीएम सर्वे हुआ था। यह सर्वे बाघों के पंजे के निशान और उनके द्वारा किए गए शिकार से किये गए थे। इससे पता चला कि बाघ कहां-कहां पर मौजूद है। उस सर्वे के आधार पर 70 ग्रिड ऐसे है, जहां पर बाघ की मौजूदगी है। ऐसे क्षेत्रों में लगे कैमरा ट्रैप में बाघ की उपस्थित आसानी से दर्ज होगी। दूसरी ओर उन्होंने बताया कि कैमरा ट्रैप से पहली बार गणना की जा रही है, इससे पहले पंचों से पहचान कर गणना की जाती थी।
इधर, कार्बेट रिजर्व के निदेशक राहुल ने बताया कि अभी बजट बढ़ने की कोई सूचना नहीं है।
- 101 ग्रिड पर 150 कैमरों से हो रही बाघों की गणना