फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच बच्चों को पढ़ाने दस किमी दूर से आते हैं तीन शिक्षक

विज्ञापन
विज्ञापन
नैनीताल। जनप्रतिनिधियों ने तो आंखें बंद की ही है प्रशासन के अधिकारियों को भी नहीं दिख रहा कि एक स्कूल ऐसा भी चल रहा है जहां छात्र संख्या सिर्फ पांच है और शिक्षक तीन। जबकि मानक है कि 10 से कम बच्चे होने पर दूसरे स्कूल में समायोजित होना चाहिए। खास बात यह भी है कि राज्य बनने के बाद इस स्कूल की स्थिति बिगड़ती गई। जहां स्थापना के बाद छात्र-छात्राओं की संख्या 100 से अधिक होती थी, वहीं पिछले आठ साल में सात से ज्यादा नहीं हो पा रही है। निरीक्षण करने के शासन के आदेश के बाद भी उच्चाधिकारी यहां तक नहीं पहुंच पाते।
विज्ञापन

स्कूल में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन पढ़ने वाले नहीं। छठी से आठवीं तक की कक्षाओं के संचालन के लिए तीन कमरे हैं लेकिन वर्तमान में सिर्फ सातवीं की कक्षा में पांच बच्चे पढ़ने आते हैं। स्कूल में प्रधानाध्यपिका सुशीला हर्बोला गणित और विज्ञान पढ़ाती हैं वहीं मुन्नी भाकुनी हिंदी, संस्कृत और देवेंद्र सिंह जीना सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी के अध्यापक हैं। हालांकि पांचों बच्चे अपनी फर्राटेदार अंग्रेजी से हर किसी को दंग कर देते हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय गेठिया में देखिए शिक्षा व्यवस्था का अजब हाल
100 से ज्यादा होती थी राज्य गठन से पहले बच्चों की संख्या
08 साल में सात से अधिक नहीं बढ़ पाए छात्र-छात्राएं


दस साल की छात्र संख्या
2010-11 - 07
2012-13 - 05
2013-14 - 05
2014-15 - 07
2015-16 - 05
2016-17 - 05
2017-18 - 06


आरटीई के नियम के अनुसार जूनियर हाईस्कूल में तीन शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य है। पूर्व में आए प्रस्ताव के आधार पर स्कूलों का सर्वे कराया गया था और जो स्कूल आरटीई के नियमों के अनुसार उनको समायोजित किया गया। स्कूलों से फिर प्रस्ताव मांगे गए हैं। फिर से सर्वे कराया जाएगा उसके बाद ही समायोजित करने की कार्यवाही होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

गोपाल स्वरूप भारद्वाज, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें