नैनीताल। हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) में बाहरी लोगों के प्रवेश पर नाराजगी जताते हुए संस्थान प्रबंधन को फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि क्यों बाहरी लोगों को मस्जिद में आने से नहीं रोका गया है। खंडपीठ ने कहा है कि प्रबंधन इसके लिये एसएसपी देहरादून को प्रत्यावेदन दें और एसएसपी इस पर कार्रवाई कर तीन जुलाई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें।
संस्थान में छात्राआें के शोषण के इस मामले में सोमवार को हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल किया। केंद्र सरकार ने बताया कि पूर्व निदेशक अनुराधा डालमिया को चार्जशीट दी गई है। म्यूजिक टीचर रमेश कश्यप को भी विभागीय जांच के बाद नौकरी से हटा दिया गया है। इसके साथ ही जेल में बंद टीचर को भी जेल में चार्जशीट दी गई है। अनुसुइया शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। संस्थान में तीन माह का बैकअप देने वाले 121 सीसीटीवी कैमरे लगाए गये हैं। 238 कैमरे लगाने का और प्रस्ताव है। छात्राओं से छेड़छाड़ व शारीरिक शोषण के मामले का पिछले वर्ष हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। इसके बाद कोर्ट ने कई निर्देश जारी किए थे। अब संस्थान में मस्जिद के बहाने बाहरी लोगों के प्रवेश पर हाईकोर्ट ने फिर नाराजगी जताई है। पूर्व में भी कोर्ट ने इस मुद्दे को उठाया था और कहा था कि संस्थान परिसर में स्थित मस्जिद के बहाने संस्थान में बाहरी लोगों को प्रवेश न करने दिया जाए।
बाहरी लोगों को संस्थान में आने से क्यों नहीं रोका : हाईकोर्ट
दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के मामले में सीजे की खंडपीठ ने जताई नाराजगी
संस्थान प्रबंधन को फटकार लगाई, एसएसपी दून से तीन जुलाई तक मांगी रिपोर्ट
केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में किया जवाब दाखिल