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चिड़ियाघर में फिर नहीं बढ़ सका बाघ का कुनबा

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शावकों का हुआ जन्म - फोटो : ANI
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नैनीताल। पंडित गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान चिड़ियाघर में बाघिन ने पहली बार एक मादा शावक को जन्म तो दिया, लेकिन अगले ही दिन उसकी मौत हो गई, जबकि शावक को बचाने के लिए वन विभाग ने पूरी ताकत लगा दी थी। डीएफओ 24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी कर रहे थे। एक कर्मचारी को शावक और बाघिन की देखभाल के लिए खास तौर पर लगाया गया था।
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चिड़ियाघर प्रशासन को 12 जनवरी को बाघिन के गर्भवती होने का पता चला था। पुष्टि के लिए मूत्र, खून का नमूना लेकर जांच को भेजा गया। जांच से उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। तब से चिड़ियाघर प्रशासन उत्साहित था। तीन दिन पहले चिड़ियाघर में पहली बार बाघिन ने एक मादा शावक को जन्म दिया। इसका पता चलते ही डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने चिड़ियाघर जाकर बाघिन, शावक की खास देखभाल के निर्देश दिए। डीएफओ मीणा ने बताया कि दो दिन पहले रात दो बजे के बाद शावक नहीं दिखा। इससे वन विभाग चिंतित हो गया। बुधवार सुबह डॉ. योगेश भारद्वाज ने भी शावक को खोजा। बाद में एक कोने में शावक का शव मिला। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसमें मां के न अपनाने, पेट के संक्रमण से मृत्यु के लक्षण मिले।

जन्म के बाद डीएफओ खुद सीसीटीवी से निगरानी कर रहे थे
24 घंटे की देखभाल के लिए कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई थी
मां के न अपनाने और पेट के संक्रमण को मौत की वजह बताया


-यह किए गए थे सुरक्षा इंतजाम-
शावक को सर्दी से बचाने के लिए बाघ जोन में हीटर लगाया गया। लोगों, वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। कानपुर, चेन्नई, पंजाब, उड़ीसा समेत कई चिड़ियाघरों के डॉक्टर आदि अधिकारियों से सलाह ली गई थी। इसके बावजूद शावक नहीं बच पाया।
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-15 दिन बच जाता तो नहीं जाती जान-
डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने बताया कि बाघ के बच्चे शुरुआत में बहुत कमजोर होते हैं। इसमें जन्म के पांच दिन तक रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है। अगर 15 दिन तक शावक बच जाता तो उसकी जान नहीं जाती।
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