गरुड़ (बागेश्वर)। मनरेगा के कुशल श्रमिकों और पंजीकृत फर्मों की सरकार पर पचास लाख से ज्यादा की उधारी चढ़ गई है। मजदूरी और सामग्री अंश का भुगतान समय पर नहीं होने से अधिकांश ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्य महिनों से ठप पड़े है।
मनरेगा के कुशल मजदूरों और सामग्री अंश सप्लाई करने वाले पंजीकृत फर्मों को सरकार ने आठ माह से भुगतान नहीं किया है। फर्मों ने अब ग्राम प्रधानों को सामग्री देनी बंद कर दी है। प्रधानों का कहना है कि मनरेगा के कुशल श्रमिकों के खातों में माह मई से मजदूरी नहीं पड़ी है। इससे विकास खंड गरुड़ के अधिकांश गांवों में मनरेगा के तहत निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। गढ़खेत के प्रधान भुवन चंद्र, नैकाना की प्रधान प्रेमा परिहार, मेलाडुंगरी के बलवंत भंडारी, भगरतोला के चंदन बोरा, थाकला के देवी दत्त पाठक, माल्दे की कमला बिष्ट, पुरुड़ा के जशवंत सिंह थायत, गढ़सेर के नवीन ममगई आदि प्रधानों का कहना है कि कुशल श्रमिकों के खातों में आठ माह से सरकार ने मजदूरी नहीं डाली है। वहीं खंड विकास अधिकारी बीसी पंत ने बताया कि मनरेगा के तहत कुशल श्रमिकों और मनरेगा के कार्यों में सामग्री सप्लाई करने वाले पंजीकृत फर्मों के बैंक खातों में धन सरकार सीधे डालती है। बताया कि कुशल श्रमिकों की मजदूरी और सामग्री अंश का भुगतान करने के संबंध में सीडीओ ने शासन को कई बार लिख दिया है।