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मसूरी छावनी परिषद में अवैध निर्माण संबंधित विशेष अपील खारिज

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नैनीताल। उच्च न्यायालय ने बिना छावनी परिषद की अनुमति के छावनी परिषद लंढौर (मसूरी) में निर्माण कार्य करने के बाद उसे कंपाउंड किए जाने के मामले में दायर विशेष अपील याचिका को खारिज कर दिया है।
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बुधवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। राजवीर हांडा ने उच्च न्यायालय में विशेष अपील दायर कर कहा था कि निर्माण कार्य को ध्वस्त न किया जाए और उसके प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर उसे कंपाउंड कर लिया जाए। छावनी परिषद की ओर से कहा गया कि 1995-96 में याची ने बिना किसी अनुमति के लंढौर कैंट मसूरी में निर्माण कार्य प्रारंभ किया। छावनी परिषद ने आपत्ति की तो याची ने दीवानी दावा दायर किया। 1997 में छावनी परिषद ने ध्वस्तीकरण के आदेश भी जारी किए थे।
परिषद की ओर से बताया गया कि वाद के लंबित रहते याची की ओर से अवैध निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया। उसके बाद याची ने 2009 में दायर वाद को वापस ले लिया और छावनी परिषद को प्रशमन (कंपाउंड) के लिए आवेदन किया। 2012 में आवेदन निरस्त कर दिया गया। इस निरस्तीकरण आदेश के खिलाफ याची ने केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया। केंद्र सरकार ने 2016 में यह अपील भी खारिज की। इसको याची ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। एकल पीठ ने इन्हें कोई राहत नहीं दी तो याची ने विशेष याचिका दायर की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने विशेष याचिका को खारिज किया।
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