द अल्टीमेट उत्तराखंड हिमालयन एमटीबी चैलेंज-2019 में प्रतिभाग कर रहीं महिला प्रतिभागियों का जुनून देखने लायक था। किसी ने साइकिलिंग के लिए बीएससी की परीक्षा छोड़ दी तो कोई घरेलू कामकाज छोड़कर यहां पहुंच गई।
साइकिलिंग में प्रतिभाग कर रहीं भारतीय महिला प्रतिभागियों से बातचीत की गई तो कई बातें सामने आईं। देहरादून की रहने वाली वंदना सिंह ने बताया कि वह गृहणी हैं, लेकिन उनमें कुछ करने का जुनून है और यही जुनून उन्हें इस ओर ले आया। उनके पति प्रताप बिष्ट शिक्षक हैं तो बेटी स्नेहा बीडीएस कर रही हैं और बेटा वैभव 12वीं का छात्र है। दो बच्चे होने के बावजूद उन्होंने साइकिलिंग जारी रखी। वह इससे पहले भी कई प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुकी हैं।
वहीं, अंजली भंडारी ने बताया कि वह डीबीएसपीजी कॉलेज देहरादून में बीएससी तृतीय सेमेस्टर की छात्रा है, लेकिन साइकिलिंग के जुनून के लिए उन्होंने परीक्षा छोड़ दी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य का पाने के लिए कभी पीछे नहीं हटना चाहिए। हल्द्वानी की रहने वाली पूनम राणा खोलिया ने बताया कि वह 2016 से साइकिलिंग कर रही हैं और एसएसबी के साथ 14 दिन के विशेष अभियान में प्रतिभाग कर चुकी हैं। हिमाचल, अरुणांचल में हुई प्रतियोगिताओं में उन्होंने स्थान भी प्राप्त किए थे।
विदेशी मेहमानों का जोश भी कम नहीं
इंडोनेशिया से आईं नोविना बीते आठ वर्षों से साइकिलिंग कर रही हैं। उन्होंने सात देशों में आयोजित साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है। बताया कि कुछ नया करने का जुनून साइकिलिंग की ओर लाया। नोविना भारत में पहली बार साइकिलिंग प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही हैं। सिरिलुक थाइलैंड की रहने वाली हैं और वहां एक साइकिल की दुकान में काम करती हैं। उन्होंने बताया कि चार सालों से साइकिलिंग कर रही हैं और पंद्रह से अधिक देशों में आयोजित साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया है। भारत में यह उनका पहला मौका है।
थाइलैंड की सुरतिया भी पहली बार भारत में आयोजित साइकिलिंग प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे पहले वह चार देशों में आयोजित प्रतियोगिताओं में शामिल हो चुकी हैं। इंडोनेशिया के दल के साथ आए कोच फेरी उत्तराखंड के ट्रैकों (मार्गों) को देखकर काफी प्रभावित हुए। उन्होंने साइकिलिंग के लिहाज से ऐसे ट्रेकों को काफी मुफीद बताया। कहा कि साइकिलिंग के रोमांचकारी सफर का आनंद ऐसे ट्रैकों पर ही आता है।मलयेशिया के अफीक भी उत्तराखंड के ट्रेकों को देखकर काफी प्रभावित हुए। उन्होंने बताया कि छह देशों में साइकिलिंग प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुके हैं और भारत में यह उनकी दूसरी प्रतियोगिता है।