हल्द्वानी। रुद्रपुर से काठगोदाम तक बनने जा रहे फोरलेन प्रोजेक्ट में संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वन विभाग ने नगला से पाल स्टोन तक हाथी कॉरिडोर बताते हुए यहां ओवरब्रिज बनाने की मांग की है। 26 अक्तूबर को प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक के साथ एनएचएआई के अधिकारियों के साथ बैठक है। अगर यहां दोनों विभागों में बात नहीं बनी तो यह प्रोजेक्ट बंद हो सकता है।
रुद्रपुर से काठगोदाम तक सड़क फोरलेन होनी है। दो माह से फोरलेन की जद में आ रहे पेड़ों का कटान चल रहा है। इस काम का ठेका सद्भाव कंपनी को मिला है। अब वन विभाग ने नगला से लेकर पाल स्टोन तक हाथी कॉरीडोर कहते हुए यहां सड़क बनाने पर आपत्ति लगा दी गई है। वन विभाग ने यहां फ्लाई ओवर बनाने को कहा है। उधर, एनएचएआई ने इतना बड़ा फ्लाई ओवर बनाने में हाथ खडे़ कर दिए है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि नगला के पास टोल टैक्स बनना प्रस्तावित है। अगर हाथी कॉरिडोर के कारण यहां टोल टैक्स नहीं बनता है तो इससे सड़क बना रही कंपनी को घाटा हो जाएगा। वह इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लेगी। इसे देखते हुए प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक के साथ एनएचएआई के अधिकारियों की बैठक 26 अक्तूबर को एफटीआई हल्द्वानी में होनी है। इसके पैरवी करने एनएचएआई के अधिक दिल्ली से आ रहे हैं।
अब हाइवे की चौड़ाई 45 मीटर करने के लिए दबाव
फोरलेन प्रोजेक्ट के तहत एनएचएआई ने सड़क की डिजायन के हिसाब से अलग-अलग जगह 45 से लेकर 65 मीटर तक जगह अधिग्रहित की है। लेकिन अब ग्रामीण सड़क की एक ओर 22.5 मीटर लेने का दबाव बना रहे हैं। उधर बीजेपी के एक सांसद भी एनएचएआई के अधिकारियों पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में एनएचएआई के अधिकारियों ने कंपनी से दोबारा प्रस्ताव बनाने को कहा है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद इसे मुख्यालय भेजा जाएगा। इस वजह से फोरलेन के काम में देरी होना संभव है।
वन विभाग ने नगला से पाल स्टोन तक हाथी कॉरिडोर बताते हुए यहां ओवर ब्रिज बनाने को कहा है। अगर यहां ओवर ब्रिज बनाया जाता है तो नगला के पास टोल टैक्स नहीं बन पाएगा। इससे फोरलेन बना रही कंपनी इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच सकती है।
- अनुज कुमार प्रोजेक्ट इंजीनियर एनएचएआई