हल्द्वानी। नगर निगम में 52 गांवों को शामिल करने की कवायद का फिर विरोध शुरू हो गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद और ब्लॉक प्रमुख भोला भट्ट ने बृहस्पतिवार को शासन के इस फैसले का विरोध करने का ऐलान किया। आगे की रणनीति तय करने के लिए पहली अक्तूबर को बुद्ध पार्क में महापंचायत बुलाई गई है।
बृहस्पतिवार को पत्रकारों से बातचीत में दोनों सरकार पंचायतों को खत्म करने पर तुली है। आपत्ति कम आए इसके लिए सरकार ने डीएम को नोडल अधिकारी नहीं बनाया जबकि सरकार को सुनवाई नैनीताल जिले में ही करनी चाहिए थी। इस दौरान मुकुल बल्यूटिया, ममता दानी, टीकम दर्म्वाल, सुरेंद्र सिंह, जया रावत, जया कर्नाटक आदि थे।
शामिल न होने का एक भी कारण नहीं बता पाए प्रमुख
हल्द्वानी। नगर निगम के सीमा विस्तार का विरोध कर रहे पंचायत प्रतिनिधि अपने विरोध का औचित्य तक स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि खेती के चौपट हो जाने का रोना रो रहे हैं, लेकिन यह बता पाने में असमर्थ हैं कि किन गांवों में 70 प्रतिशत खेती हो रही है। बृहस्पतिवार को जब उनसे पूछा गया कि विरोध क्यों हो रहा है जबकि निगम में शामिल होने पर इन गांव को स्ट्रीट लाइट, सीवर, कूड़े आदि से छुटकारा मिल जाएगा। इस पर ब्लॉक प्रमुख भोला भट्ट ने कहा कि निगम अपने क्षेत्र में खुद ये व्यवस्था नहीं कर पा रहा है, तो वह कैसे इन गांव में ये व्यवस्था कर लेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इसका राजनीतिक फायदा उठाने के लिए यह काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से नगर निगम में गांवों को शामिल करने का शासनादेश है, उस शासनादेश में साफ लिखा है कि गांव जिसमें 70 या उससे अधिक खेती हो रही है, उसे शामिल नहीं किया जा सकता। उनसे पूछने गया कि ऐसे कौन से गांव हैं जहां 70 प्रतिशत खेती हो रही है। उनका कहना था कि ये प्रस्ताव डीएम के माध्यम से भेजा जा चुका किन गांव के नाम वे नहीं बता पाए।