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14 दिन का ‘कोरोना वनवास’ खत्म

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हल्‍द्वानी में घर जाने की तैयारी करते लोग। - फोटो : HALDWANI
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शेल्टर होम से लोगों को भेजा गया घर
- पिथौरागढ़ तीन, बागेश्वर छह और चंपावत के लिए एक बस भेजी गईं
- केमू और निजी बसों से 250 से अधिक लोगों को उनके घर भेज गया
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। शेल्टर होम में रोके गए तमाम लोगों बुधवार तड़के बसों से घर भेज दिया गया। कुछ लोग अभी यहीं रह गए हैं। इनको यहां क्वारंटीन पर रहने की बात कहकर रोका गया था।
सुबह प्रशासन ने केमू और निजी बसों से बदरीपुरा स्टेडियम और एमबी इंटर कॉलेज से 250 से अधिक लोगों को घर भेजा। ये लोग अब तक सभी स्वास्थ्य परीक्षणों में पास हुए थे। इनमें पिथौरागढ़ को तीन, बागेश्वर को छह और चंपावत जिले को एक बस भेजी गईं। जिन लोगों को घर भेजा जाना था उन्हें मंगलवार देर रात सूचना दे दी गई थी। जाते वक्त सभी लोग काफी खुश थे।
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बुधवार सुबह छह बजे से ही बसों को रवाना करने का सिलसिला शुरू हो गया था। भेजे गए सभी लोगों को अभी भी नियमों के साथ रहने के लिए कहा गया है। अभी उत्तर प्रदेश को जाने वालों को रोका गया है, इसके अलावा कई लोग ऐसे हैं जिनका 14 दिन का क्वारंटीन पूरा नहीं हुआ है। क्वारंटीन पूरा होने और स्वास्थ्य जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि मंगलवार को डीएम ने भी इस बात के संकेत दिए थे कि शेल्टर होम में रोके गए लोगों को घर वापस भेजा जा सकता हैं। अब हल्द्वानी और आसपास के शेल्टर होम में 200 लोग रह गए हैं।
अफसरों ने ली राहत की सांस
हल्द्वानी। शेल्टर होम में रोके गए लोग धीरे धीरे अफसरों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे थे। इनमें से अधिकतर लोगों का 14 दिन क्वारंटीन 12 अप्रैल को पूरा हो गया था। यह लोग बार बार घर जाने की बात कर रहे थे। पिछले दो दिनों से शेल्टर होम में रोके गए लोगों को खाना खिलाने तक के लिए मनाना पड़ता था। कई बार पुलिस ने इनकी नोकझोंक भी हुई थी।
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कोरोना को लेकर बैठा था लोगों में डर
हल्द्वानी। स्टेडियम में लोगों की काउंसलिंग कर रहीं सुनयना बिष्ट ने बताया कि फिर से लॉकडाउन बढ़ने की बात सुनने के बाद इन लोगों में काफी गुस्सा देख गया था और समझाने में दिक्कत आ रही थी। बताया कि शुरू में इन लोगों की समझ में ही नहीं आ रहा था कि उन्हें यहां क्यों रोका है। वो सोचते थे कि उन्हें कोरोना हो गया है। यहां कई महिलाएं भी थीं। बहुत से लोग कम पढ़े लिखे और गरीब तबके के थे। सुनयना रोज इनकी काउंसलिंग कर कोरोना को लेकर उनका डर दूर करती थीं। कुछ लोगों के तो परिवार वाले तक ये सोचते थे कि शेल्टर होम में रुके उनके परिजन को कोरोना हो गया है। उनको भी फोन पर समझाना होता था।
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