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ऑब्जर्वेशन पिलर बताएंगे नैनीताल की पहाड़ियों का धंसाव

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नैनीताल। सरोवरनगरी की मालरोड से लगी पहाड़ी में धंसाव हो रहा है। कई बार इसका सर्वे हो चुका है। इस दौरान वैज्ञानिक कई बार चिंता व्यक्त कर चुके हैं। लोनिवि भी धंसाव की स्थिति पर नजर रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में ऑब्जर्वेशन पिलर लगाने की कवायद कर रहा है। विभाग ने इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।
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जानकार बताते हैं कि नैनीताल की भौगोलिक संरचना और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अंग्रेजों ने यहां के संवेदनशील इलाकों को चयनित कर वहां ऑब्जर्वेशन पिलर लगाए थे। बताते हैं कि अंग्रेज इन पिलरों के माध्यम से पहाड़ियों में होने वाले धंसाव का आकलन करते थे, लेकिन अब ये पिलर गायब हैं। मालरोड से लगी पहाड़ी की संवेदनशीलता को देखते हुए एक बार फिर इन ऑब्जर्वेशन पिलरों की जरूरत महसूस की जा रही है। आईआईटी रुड़की ने मालरोड से लगी पहाड़ी का सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट के आधार पर लोनिवि प्रांतीय खंड ने करीब 41 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन बीते वर्ष लोअर मालरोड के एक बड़े भाग के धंसने, सड़क के अन्य भागों में आ रही दरारों ने भी चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्ष 10 अक्तूबर को निरीक्षण के लिए आए वैज्ञानिक प्रो. आरएएन बालाजन ने 1981-1982 के बीच किए अध्ययन के आधार पर पहाड़ियों में धंसाव माना था। इन पहाड़ियों का स्थायी उपचार शुरू होने तक संभावित धंसाव को भी आंकना जरूरी बताया जा रहा है। ऑब्जर्वेशन पिलर से पहाड़ी में हुए धंसाव का पता चल जाएगा।


ऑब्जर्वेशन पिलर बताएंगे पहाड़ का धंसाव
लोनिवि प्रांतीय खंड ने शासन को भेजा प्रस्ताव

ऑब्जर्वेशन पिलर लगाने के लिए करीब 20 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इन पिलरों को नगर के संवेदनशील क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। - डीएस बसनाल, ईई लोनिवि प्रांतीय खंड।
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