हल्द्वानी। निजी एवं पब्लिक स्कूलों में बच्चों के दाखिले करने में अभिभावकों से मनमाने ढंग से फीस वसूली जा रही है। शिक्षामंत्री ने री- एडमीशन फीस लेने पर पाबंदी लगाई तो स्कूलों ने अभिभावकों से अब मनमाने ढंग से वार्षिक शुल्क के नाम पर वसूली शुरू कर दी है।
हाल यह है कि छोटे स्तर के निजी स्कूल छह हजार तक तो बड़े पब्लिक स्कूल 15 हजार रुपये तक वार्षिक शुल्क वसूल रहे हैं। अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान हैं मगर प्रशासन और शिक्षा बेखबर बना हुआ है।
नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी एवं पब्लिक स्कूलों ने 15 से 25 प्रतिशत तक मासिक फीस बढ़ा दी है, जिससे अभिभावकों की जेब पर प्रतिमाह करीब दो सौ से लेकर चार सौ रुपये तक का बोझ बढ़ गया है। स्कूलों द्वारा वार्षिक शुल्क के नाम पर छह से 15 हजार रुपये प्रति बालक वसूल किए जा रहे हैं।
इसी तरह जिन स्कूलों में कक्षा एक से तीन तक मासिक फीस साढ़े छह सौ से साढ़े आठ सौ रुपये थी, अब वहां दो सौ से तीन सौ रुपये अधिक देने होंगे। नर्सरी और एलकेजी जैसी छोटी कक्षाओं की फीस आठ सौ से 1200 रुपये तक कर दी है, जबकि कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की फीस 1500 से दो हजार तक पहुंच गई है।
डायरी 200 रुपये की तो टाई 100 की
हल्द्वानी। कुछ निजी स्कूलों में लूट का हाल यह है कि स्कूल के नाम एवं मोनोग्राम छपी डायरी की कीमत सौ रुपये से लेकर 200 रुपये तक वसूल की जा रही है। कई स्कूल अपने यहां से ही बच्चों की टाई - बेल्ट भी 100 से लेकर 150 रुपये में दे रहे हैं।
स्कूलों से मांगेंगे फीस स्ट्रक्चर : सीईओ
हल्द्वानी। मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता ने कहा कि पब्लिक स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकते। कई स्कूलों की फीस बढ़ाने की शिकायतें मिली हैं। सीबीएसई से जुड़े सभी पब्लिक स्कूलों से फीस स्ट्रक्चर मांगा जा रहा है। अगर किसी स्कूल ने अत्यधिक फीस बढ़ाई है तो उसे इसका कारण भी स्पष्ट भी करना होगा।
15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ाई फीस, शिक्षा विभाग बेखबर
छोटे स्कूल छह तो बड़े स्कूल 15 हजार रुपये तक मनमाने ढंग से वसूल रहे वार्षिक शुल्क