हल्द्वानी। जीएसटी पोर्टल के बाद अब ई वे बिल सिस्टम कारोबारियों के लिए मुसीबत बन गया है। माल को यहां वहां भेजने के लिए जरूरी ई वे बिल जेनरेट करने के लिए लाग इन बनाने में ही तकनीकी गड़बड़ हो रही है। इधर राज्य अधिकारियों का दावा है कि ऐसी शिकायतें मिली हैं इनका निस्तारण भी किया गया है।
ई वे बिल में कारोबारियों को 10 किमी से अधिक दूरी पर माल भेजने के लिए ई वे बिल जरूरी है। इस बिल को ऑनलाइन ही जेनरेट किया जाता है। इसके लिए कारोबारियों, ट्रांसपोर्टरों को जीएसटी की तरह यहां भी ऑनलाइन पंजीयन करा आईडी बनानी है। इधर आईडी बनाने में कारोबारियों के पसीने छूट गए है। पोर्टल पर अंतिम चरण पर पहुंच जाने पर भी आईडी नहीं बन पा रही है। ऐसे में कारोबारी बिना ई वे बिल के पुराने ढर्रे पर ही दस्तावेजों के आधार पर ही माल आपूर्ति कर रहे हैं। इस बाबत राज्य कर अधिकारियों को भी जानकारी दी गई है। इधर राज्य कर अधिकारियों का दावा है कि ऐसी 30-40 शिकायतें मिली हैं जिनका तकनीकी तौर पर निस्तारण कर सभी की आईडी बना दी गई है।
ये आ रही हैं समस्याएं
-पोर्टल बार बार हैंग कर जा रहा है
-पंजीयन के अंतिम चरण में प्रोसेसिंग में घंटों लग जा रहे हैं
-कभी जीएसटीएन नंबर गलत बता दे रहा है
ई वे बिल आईडी में तकनीकी कमियां आ रही हैं, इनको समय समय पर निस्तारित किया गया है। यदि किसी कारोबारी को समस्या है तो राज्य कर विभाग की हेल्प लाइन नंबर 7055602808 और 9568027000 पर संपर्क कर सकते हैं।
-विनय प्रकाश ओझा, सहायक आयुक्त राज्य कर