नैनीताल। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध टीएचडीसी हाइड्रो कॉलेज से निष्कासित एसोसिएट प्रोफेसर एके सिंह की बहाली के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इसके साथ ही अनुशासनहीनता के आरोपों पर उनका प्रत्युत्तर मिलने के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई पर निर्णय लेने के निर्देश देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है। एके सिंह पर उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने, परीक्षा नियंत्रक से बदतमीजी करने, आरोप संबंधी पत्रों के जवाब न देने और जांच समिति के समक्ष उपस्थित न होने के आरोप लगे थे। बता दें कि इस संबंध में अमर उजाला के एक मई के संस्करण में गलत खबर छप गई थी, जिसका हमें खेद है।
प्रो. एके सिंह ने अपने निष्कासन से संबंधित आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि वे कॉलेज में स्थायी एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किए गए थे। सुनवाई के दौरान याची के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि संस्थान की ओर से एके सिंह की नियुक्ति को गलत और त्रुटिपूर्ण बताने संबंधी याचिका पूर्व में हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से भी निरस्त हो चुकी है, इसलिए अनुशासनहीनता के साथ ही उनकी नियुक्ति गलत होने के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। कोर्ट ने एसोसिएट प्रो. सिंह को बहाल किये जाने के साथ ही उन्हें निर्देशित किया कि वे तीन सप्ताह में उन पर लगाए गए आरोपों के जवाब संस्थान को दें। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स उनका जवाब मिलने के दो माह के भीतर अनुशासनहीनता के संबंध में नियमानुसार उचित निर्णय ले। कोर्ट ने उनके सेवा से बाहर रहने की अवधि के देय इत्यादि पर भी एसोसिएट प्रो. सिंह के प्रत्युत्तर के बाद निर्णय लेने के निर्देश दिए।
एसोसिएट प्रोफेसर एके सिंह की बहाली के निर्देश
टीएचडीसी हाइड्रो कॉलेज का मामला, हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित की