फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैसे सजेगा बेटे के सिर पर सेहरा, कैसे उतारूं कर्ज

विज्ञापन
फसल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
हल्द्वानी। बेमौसम की बारिश ने किसी किसान के बेटे के सिर सेहरा सजाने के अरमान धोये तो किसी को बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता में डाल दिया। जिले में 47 हजार किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सहारा भी नहीं है और आपदा राहत कब मिलेगी, यह अभी पता ही नहीं है।
विज्ञापन


जिले के चोरगलिया, लामाचौड़, हल्दूचौड़, बिंदुखत्ता, कालाढूंगी, कोटाबाग समेत आसपास के सैकड़ों गांवों में गेहूं का खूब उत्पादन होता है। जिले में पैदा होने वाले गेहूं के कुल उत्पादन की लगभग 70 फीसदी पैदावार इन्हीं गांवों में होती है।

इस गेहूं की फसल के लिए गौलापार ही नहीं बल्कि अधिकांश गांवों के किसानों ने सहकारी समितियों और बैंकों से ऋण लेकर गेहूं की बुवाई की। अब बेमौसमी बारिश ने उनके सारे अरमान धो दिए हैं।
विज्ञापन


गौलापार के रतनपुर निवासी 66 वर्षीय महेश चंद्र सुनाल ने दौलतपुर स्थित ग्रामीण बैंक से तीन लाख रुपये कर्ज लेकर पांच एकड़ में गेहूं की बुवाई की। उम्मीद थी कि लगभग 75 क्विंटल गेहूं की पैदावार होगी। जिसे बेचकर मिली रकम से बैंक कर्ज अदायगी के साथ साथ छोटे बेटे निखिल का विवाह करेंगे। सुनाल कहते हैं कि पिछले तीन साल से लगातार टमाटर का उत्पादन घाटे का सौदा बन रहा था तो इस बार गेहूं लगाया। फसल बर्बाद होने के बाद अब वह हाल फिलहाल तो बेटे के विवाह करने की स्थिति में नहीं हैं।

गौलापार के रतनपुर नेगी गांव निवासी विनोद चंद्र दुम्का और उनके दो भाइयों ने साढ़े चार एकड़ में गेहूं की बुवाई की थी। सोसायटी से साढ़े चार लाख रुपये कर्ज लिया था। पिछले साल ही बेटी की शादी भी की थी। सोचा था कि गेहूं बेचने के बाद बैंक समेत अन्य कर्ज की अदायगी करेंगे। परिवार में पत्नी समेत दो बेटियां और एक बेटा है। बेटा भी बेरोजगार है। दुम्का का कहना है कि मौजूदा हालात में तो खाने के भी लाले पड़ने वाले हैं।
विज्ञापन



बेमौसम बारिश ने कई किसानों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा किया
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से वंचित हैं जिले के 47 हजार किसान
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें