हल्द्वानी एसटीएच और महिला अस्पताल में तैनात 11 नर्सों का चयन स्वास्थ्य विभागों में होने से नर्सिंग स्टाफ का संकट पैदा हो गया है। एसएनसीयू में तैनात नर्सों ने नियुक्ति पत्र जारी होते ही काम छोड़ दिया है। अस्पताल के दूसरे विभागों की नर्सों के माध्यम से स्पेशल न्यूबाॅर्न केयर यूनिट में कार्य किया जा रहा है।
सुशीला तिवारी अस्पताल के एसएनसीयू में नर्सों के कुल 13 पद स्वीकृत हैं। इनमें से आठ नर्सों का चयन स्वास्थ्य विभाग में हो गया है। वर्तमान में दूसरे वार्डों की नर्सों से व्यवस्था बनाई जा रही है। एसटीएच के बाल रोग विभाग में कुल 24 बेड हैं जिनकी देखभाल के लिए एक दिन में चार डॉक्टरों समेत 13 नर्सों की आवश्यकता रहती है। यहां वर्तमान में तीन डॉक्टर तैनात हैं। आवश्यकता पड़ने पर बाल रोग विभाग से एमडी कर रहे डॉक्टरों को जिम्मेदारी दी जा रही है।
महिला अस्पताल के एसएनसीयू में स्टाफ की कमी
महिला अस्पताल के एसएनसीयू में भी लंबे समय से स्टाफ की कमी चल रही है। एसएनसीयू में नर्सों के 10 पद स्वीकृत हैं। इनमें से तीन नर्सों का चयन स्वास्थ्य विभाग में होने के बाद वर्तमान में चार नर्सों के माध्यम से स्पेशल न्यूबाेर्न केयर यूनिट में कार्य किया जा रहा है। विभाग की एक नर्स स्थायी, एक अस्थायी और एक मेटरनिटी लीव पर है। इसके चलते विभाग के 12 बेड पर तीन या चार नवजात शिशुओं को रखा जा रहा है। सीएमएस डॉ. उषा जंगपांगी ने बताया कि यूनिट में वर्तमान में चार डॉक्टर कार्यरत हैं जबकि दो एमओ के पद खाली हैं।
विभाग में तैनात नर्सों का सरकारी विभाग के लिए चयन हो गया है। ऐेसे में संकट बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज और दूसरे वार्डों की नर्सों के माध्यम से व्यवस्था को सुचारु रखा जा रहा है।
-डॉ. रितु रखोलिया, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज
बाल रोग विभाग में एनएचएम के माध्यम से ही डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भर्ती होती है। वर्तमान में विभाग में तैनात आठ नर्सों का सरकारी विभागों में चयन के बाद स्टाफ की कमी बनी हुई है। व्यवस्था बनाने के लिए दूसरे वार्ड की नर्सों को लगाया है।
- डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य, सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज