हल्द्वानी। कार्बेट के बाघ अब सोलर ट्यूबवेल के पानी से अपनी प्यास बुझाएंगे। जंगल में पानी की कमी को देखते हुए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में कई जगह सोलर ट्यूबवेल पंपों को लगा भी दिया गया है। अब तराई वन प्रभाग में भी यह खास पंप लगाने की तैयारी है।
जंगलों में पानी का संकट गहराने पर पानी की तलाश में वन्यजीव आबादी की तरफ रुख करते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ जाता है। इसके मद्देनजर वन विभाग ने जंगल के अंदर ही सोलर ट्यूबवेल लगाने का काम शुरू किया है। इसी के तहत बाघों की दृष्टि से सबसे अहम सीटीआर के गौजपानी और बंबू स्रोत के पास ऐसे दो सोलर ट्यूबवेल लगाए गए हैं। बंगपानी में निर्माण कार्य जारी है। वाटर होल भी बनाया जा रहा है। सीटीआर के उप निदेशक अमित वर्मा के अनुसार तीन साल पहले गैरल में सोलर पंप के माध्यम से वाटर लिफ्टिंग योजना को लागू किया गया था। इसकी सफलता के बाद अगले चरण में सोलर ट्यूबवेल पंप लगाने का काम शुरू किया गया है। इन पंप के साथ नये वाटर होल भी बनाए गए हैं। जल्द ही और वाटर होल भी बनाए जाएंगे। एक पंप लगाने की लागत करीब छह लाख है जबकि मेंटेनेंस जीरो है। ऐसे में एक बार पंप लगाने के बाद ज्यादा चिंता नहीं करनी होगी।
सीटीआर में कई जगह लगाए गए पंप, अब तराई के जंगलों में तैयारी
गौजपानी और बंबू स्रोत लग गए, बंगपानी में निर्माण कार्य जारी
एक साथ कई लक्ष्यों की करेगा पूर्ति
हल्द्वानी। सीटीआर के निदेशक राहुल के अनुसार वन्यजीवों के अलावा सोलर पंप लगने से स्टाफ की भी पेयजल की समस्या काफी हद तक दूर होगी। जंगल में आग पर काबू पाने में भी सोलर पंप और वाटर होल मददगार साबित होंगे। सीटीआर में करीब छह पंप और लगाने की योजना है।
दूसरे जंगलों में लगाने की तैयारी
हल्द्वानी। कार्बेट पार्क में सोलर पंप लगाने के बाद दूसरे जंगलों में भी यह प्रयोग करने की तैयारी है। पश्चिमी वृत्त वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार रामनगर, तराई पश्चिमी, तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी वन प्रभाग के ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करने के साथ सोलर पंप को लगाया जाएगा। इन पंपों के माध्यम से जो पानी की आपूर्ति होगी, उससे घास का मैदान विकसित कर वासस्थल सुधार का कार्यक्रम भी शुरू करने की योजना है।