नैनीताल। गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के आदेश को भले ही सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश मिला हो, लेकिन उच्च हिमालय क्षेत्र में ग्लेश्यिर और पेड़ पौधों का जीवित व्यक्ति का दर्जा बरकरार है। उच्च न्यायालय ने एक अलग याचिका के संदर्भ में यह आदेश जारी किया था। मतलब साफ है कि ग्लेश्यिर और पेड़ पौधों के एक व्यक्ति के समान ही अधिकार की बात की जा सकती है और इनको नुकसान पहुंचाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने मोहम्मद सलीम बनाम राज्य सरकार के मामले में गंगा और यमुना नदी को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने का ऐतिहासिक फै सला किया था। इसी फैसले के आधार पर अधिवक्ता ललित मिगलानी ने उच्च न्यायालय से हिमालय को भी जीवित व्यक्ति घोषित करने का आग्रह एक अलग याचिका के माध्यम से किया था। वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की पीठ ने ललित मिगलानी की याचिका पर एक अप्रैल 2017 को प्रदेश में उच्च हिमालय क्षेत्र के जंगल, नौलों, धारों, ग्लेश्यिर आदि को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने का आदेश जारी किया था। गंगा और यमुना के जीवित व्यक्ति संबंधित आदेश को प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश जारी किया लेकिन ललित मिगलानी की याचिका पर दिए गए आदेश को कोई चुनौती नहीं मिली। अधिवक्ता ललित मिगलानी के मुताबिक ग्लेशियरों से संबंधित उच्च न्यायालय का यह आदेश प्रभावी है। इसका मतलब यह भी हुआ कि पेड़ पौधों और ग्लेश्यिर को नुकसान पहुंचाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है। ललित मिगलानी की ही जनहित याचिका 140/2015 में साफ कहा था कि सभ्यता को बचाए रखने के लिए गंगा को बचाना जरूरी है। अब जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के आदेश को फ्रांस की सेंटर फॉर साइंस रिसर्च व सेंट्रल फॉर हिमालयन स्टडीज ने अपने पाठ्यक्रम में अध्ययन के लिए शामिल किया है। रविवार को फ्रांस की शोधार्थी डेनियल बेरती ने अधिवक्ता से मुलाकात कर फैसले के अहम बिंदुओं के बारे में जानकारी ली थी। डेनियल ने गंगा की धार्मिक व सामाजिक मान्यता को लेकर भी तथ्यात्मक जानकारी जुटाई।
अधिवक्ता ललित मिगलानी की याचिका पर गंगा और यमुना की तरह ग्लेश्यिर को दिया गया था जीवित व्यक्ति का अधिकार
एक अप्रैल, 2017 को उच्च न्यायालय ने सुनाया था फैसला
गंगा के जीवित व्यक्ति संबंधित आदेश पर ही मिला था सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश