वह जितने उम्दा कलाकार थे उतने ही सरल और मिलनसार इंसान भी थे। करीब ढाई दशक पहले मन्ना डे तीर्थनगरी में एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे।
इस कार्यक्रम में फोटोग्राफी करने वाले दिलीप शर्मा मन्ना डे से हुई मुलाकात को अपने जीवन के खास लम्हों में शुमार करते हैं। उस समय के संस्मरण उन्होंने अमर उजाला से साझा किये।
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भजनों का कार्यक्रम प्रस्तुत किया
बकौल दिलीप मुनिकीरेती में प्रख्यात संत शिवानंद सरस्वती के जन्म शताब्दी समारोह में मन्ना डे ने भजनों का कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। वे इस दौरान सभी से बेहद आत्मीयता से मिले।
दिलीप कहते हैं कि मन्ना डे साधारण व्यक्तित्व के असाधारण कलाकार थे। जब उनसे बातचीत की तो उन्होंने पढ़ाई लिखाई के बारे में जानकारी ली और आशीर्वाद दिया।
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सीख दिलीप को आज भी याद
जीवन में हमेशा मेहनत और ईमानदारी से काम करने की उनकी सीख दिलीप को आज भी याद है। कार्यक्रम में उन्होंने सहजता से सबके साथ फोटो खिंचवाए थे। इस कार्यक्रम में भजन गायक हरिओम शरण, नंदिनी शरण, नितिन मुकेश समेत कई नामी कलाकार शामिल हुए थे।
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नितिन ने कहा, मैं इस योग्य नहीं
दलीप के अनुसार कार्यक्रम के मंच पर शिवानंद आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती समेत कई संत, महात्मा और गायक मन्ना डे, पुरुषोत्तम दास जलोटा आदि नामी कलाकार मौजूद थे।
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इस दौरान गायक नितिन मुकेश को भी मंच पर आमंत्रित किया गया। मगर उन्होंने संतवृंद और संगीत की महान विभूतियों की मौजूदगी में यह कहते हुए मंच साझा नहीं किया कि वे अपने आप को इतने सम्मानित मंच पर बैठने योग्य नहीं समझते। वह दर्शक दीर्घा में ही बैठे। बड़ों के प्रति उनके इस आदर को सभी ने सराहा।