प्रदेश में जिला स्तर से दवाओं की खरीद पर फिलहाल रोक लग गई है। लंबा समय बीतने के बाद भी मुख्य चिकित्साधिकारियों के स्तर से दवा की खरीद नहीं हो सकी है। नई औषधि क्रय नीति के अनुसार कुल दवाओं की 30 फीसदी जिला स्तर से ही खरीदी जानी है। शेष 70 फीसदी दवाओं की खरीद स्वास्थ्य महानिदेशालय के स्तर से होनी है।
नई औषधि क्रय नीति लागू होने के बाद से प्रदेश में दवाओं की खरीद काफी कम हुई है। नीति में 70 फीसदी दवाओं की खरीद महानिदेशालय और 30 फीसदी सीएमओ कार्यालय के स्तर से करने का प्रावधान है। इसके लिए नियम काफी सख्त किए गए हैं।
23 फीसदी कम कीमत पर करानी होगी दवा उपलब्ध
राज्य से बाहर की फर्म का 70 करोड़ और राज्य की फर्म का 20 करोड़ रुपये का टर्नओवर होने की अनिवार्यता रखी गई है। आपूर्ति करने वाली फर्म को 23 फीसदी कम कीमत पर दवा उपलब्ध करानी होगी।
इसके चलते सीएमओ स्तर पर दवा उपलब्ध कराने में कोई भी फर्म दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। ई टेंडरिंग की जटिलताओं के चलते भी पूरी प्रक्रिया में देरी हो रही है। ई टेंडरिंग की शर्तों के अनुसार डिजिटल सिग्नेचर समेत अन्य शर्तों में पहले की तुलना में काफी अधिक समय लग रहा है।
महानिदेशालय स्तर से भी सभी दवाओं की खरीद नहीं हो पाई है। इसके चलते अस्पतालों में कुछ दवाओं की कमी लगातार बनी हुई है। जिससे मरीज बाजार से महंगे दामों पर दवा खरीदने को मजबूर हैं।