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उत्तराखंड आपदा का असर, शादियों पर बरपा कहर

Tue, 02 Jul 2013 01:37 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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उत्तराखंड में अभी आपदा पीड़ित बदरी-केदार-गंगोत्री घाटी में चारो ओर मौत के सुर गूंज रहे हैं। प्रकृति का नियम है। विनाश अंत नहीं है। इसके बाद सृजन भी होगा।
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मौत के थपेड़ों से बेजार जिंदगी भी हौले-हौले चल पड़ेगी। शुभ लग्न में लोगों के घरों में शादी-ब्याह भी तय हैं। कहते हैं जोड़ियां जमीन पर नहीं आसमानों में बनती हैं। शादी तय हुई है तो होकर रहेगी। बेशक बड़ी बाधाएं हैं।
सड़कें टूटी हैं और पगडंडियां घायल। ऐसे में लोगों के सामने शादी-ब्याह के इंतजाम की भी चुनौती है। लेकिन लोगों को उम्मीद है कि कोई न कोई सूरत जरूर निकलेगी।
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केस-एक
चमोली जिले में नारायणबगड़ ब्लाक का पंती गांव। यहां राधाकृष्ण पुरोहित की बेटी की बारात 05 जुलाई को कमेड़ा से आनी है। पुरोहित कहते हैं कि तैयारियां हो चुकी हैं। लेकिन जगह-जगह सड़कें टूटी हैं ऐसे में समस्या हो रही है। यदि टूटी सड़कों की जगह सुरक्षित पैदल रास्तों का निर्माण हो जाता तो समस्या कम होती।

केस-दो
थराली तहसील (चमोली) के झड़िया गांव के ललित की बारात 05 जुलाई को देवाल के हाट-कल्याणी जानी है। मार्ग क्षतिग्रस्त है। लेकिन शादी की तैयारियां पूरी हो चुकी है। ऐसे में बारात को 20 किमी पैदल चलकर दुल्हन लानी होगी।

आपदाग्रस्त हो गए, टालनी पड़ी शादी
थराली के चेपड़ों गांव के मोहनराम के पास न घर बचा न जमीन। यहां तक कि तन ढकने के लिए एक कपड़े भी नहीं। सितंबर माह 17 तारीख को बेटे की शादी के सपने संजोए टेलरिंग का काम करने वाले मोहन राम के आगे अब बेटे की शादी से पहले आ की चुनौती है। शादी स्थगित कर दी गई है। बकौल मोहनराम तीन साल पूर्व आई आपदा में उसका मकान बह गया था। जिसके बाद अब अन्य स्थान पर मकान बनाया लेकिन इस बार प्रकृति के कहर ने उसे भी छीन लिया।
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