बिलासपुर पहली बार भारत आई आस्ट्रेलिया की महिला ने उत्तराखंड में आई जलप्रलय का खौफनाक मंजर देखा।
वह ग्यारह दिनों तक भूखी प्यासी रही। बारिश का पानी पीकर किस तरह दिन काटे। सेना की मदद से बाहर निकली यह महिला अभी भी दहशत में है।
हेमकुंड साहिब के दर्शन किए बिना बिलासपुर लौटी आस्ट्रेलिया की महिला जोडी ली ने जल प्रलय का आंखों देखा हाल सुनाया। ली ने बताया कि वह आस्ट्रेलिया के एडीलेड की रहने वाली है।
उसने बिलासपुर के गगनपुर निवासी संतोख सिंह से आस्ट्रेलिया में ही शादी की है। संतोख वहां कारोबार करते हैं। वह 13 मार्च को पहली दफा अपनी ससुराल आई। 14 जून 2013 को संतोख अपनी पत्नी और मां सुखविंद्र कौर, मामा बलविंद्र सिंह, मामी सुखविंद्र कौर और दो वर्ष के ममेरे भाई पारस के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा करने गए थे। 14 की शाम जोशीमठ पहुंचे।
अगले दिन शाम को 13 किलोमीटर की पदयात्रा करके गोविंदधाम पहुंचे। 16 की सुबह हेमकुंड साहिब जाना था, लेकिन गुरुद्वारे के प्रबंधतंत्र ने सूचना दी कि केदारनाथ में तबाही मची है और चार किलोमीटर आगे का पुल भी टूट चुका है। करीब चार हजार लोगों की भीड़ में वह भी परिवार समेत गोविंदघाट लौटने लगे।
गोविंदघाट से पहले वाला पुल भी बाढ़ में वह गया। गोविंदघाट के गुरुद्वारे समेत पूरा क्षेत्र तबाह हो गया। ग्यारह दिन तक पूरा परिवार वहीं फंसा रहा। खाने को एक दाना भी नहीं था।
बारिश का पानी पीकर किसी तरह दिन काटे। इस बीच सेना के जवानों ने जब रेस्क्यू शुरू कर दिया था। विदेशी महिला के अनुरोध पर सेना ने 11वें दिन उन्हें जोशीमठ पहुंचाया। 12वें दिन वह किसी तरह जान बचाकर घर आए हैं।