शास्त्रों में लिखा है बद्रीकाश्रम यानि बदरी सदृशं तीर्थम, न भूतो न भविष्यति। अर्थात, बदरीनाथ जैसा स्थान इस भूलोक पर न पहले था और न भविष्य में होगा। लेकिन इन दिनों भूबैकुंठ में त्राहिमाम-त्राहिमाम मची हुई है।
भटक रहे तीर्थयात्री
बदरीविशाल के चरणों से होकर गुजर रही मां अलकनंदा ने ऐसा कहर बरपाया कि बदारीविशाल के दर्शनों को पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों व उनके परिजनों को संकट में डाल दिया है। 16/17 जून को घटित आपदा के मारे तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम में इधर-उधर भटक रहे हैं।
तीर्थयात्रियों को यहां खाने, रहने, टहलने की पूरी व्यवस्था है, लेकिन जहां भी देखो यात्री किसी उधेड़बुन में लए हुए हैं। बदरीनाथ धाम परिसर इन दिनों तीर्थयात्रियों से खचाखच भरा रहता था। बदरीविशाल के दर्शनों के लिए करीब आधा किमी तक लाइन लगी रहती थी। लेकिन धाम परिसर में सिर्फ सन्नाटा पसरा हुआ है।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
मंदिर के गर्भगृह से आचार्य ब्राह्मणों के मंत्रों की आवाज जरुर आ रही है। बदरीविशाल का महाभिषेक, बाल भोग, संकल्प, श्रृंगार और आरती अपने नित्य कर्म व नियत समय पर हो रहे हैं। लेकिन तीर्थयात्रियों की लाइन बदरीविशाल के दर्शनों को नहीं बल्कि हेलीपैड पर लगी हुई है।
सकुशल अपने घर भेज दें
तीर्थयात्री प्रतिदिनि तड़के हेलीपैड पर लाइन लगा रहे हैं। वे भगवान बदरीविशाल से प्रार्थना कर रहे हैं कि हे बदरीनाथ, हमें सकुशल अपने घर भेज दे। बदरीनाथ बाजार में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। यहां रुद्राक्ष, कपडे़, भजन, संध्या की सीडी की दुकानें बंद हो गई हैं। व्यवसायियों ने अपना सामान समेट लिया है।
धाम में पंडा पंचायत, मंदिर समिति, जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों द्वारा चार जगहों पर भंडारे लगाए गए हैं। साकेत चौराह पर लगाए गए भंडारे में बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गई है। सोमवार और मंगलवार को तीर्थयात्री मौसम खराब होने के चलते दिनभर अपने कमरों में मायूस दिखे। कुछ तीर्थयात्री अपने सगे-संबंधियों से बात करने के लिए बाजार में आए। फिर अपने कमरों में चले गए।
आरती में भी नहीं जा रहे
तीर्थयात्री बदरीनाथ की सांय की आरती में भी नहीं जा रहे हैं। यहां आरती में इक्का-दुक्का तीर्थयात्री ही दिखाई देते हैं। बाकी स्थानीय लोग ही आरती के दर्शन करने जाते हैं। मंगलवार को जब दोपहर बाद बारिश हुई तो तीर्थयात्री अपने-अपने कमरों में बैठ गए। मंगलवार को ही सुबह सेना ने 20-20 तीर्थयात्रियों का ग्रुप बनाकर हेलीकॉप्टर में ले जाने का खाका भी तैयार किया। जिससे तीर्थयात्रियों ने राहत की सांस ली है।
जो तीर्थयात्री पैदल जा रहे हैं। उनमें से कई वापिस बदरीनाथ आ रहे हैं। सोमवार को दिल्ली के रामचंद्र पटेल का सात सदस्यी ग्रुप हनुमान चट्टी से मंगलवार को वापिस बदरीनाथ पहुंच गया। उन्होंने कहा कि दस दिन और बदरीनाथ में रह लेंगे, लेकिन पैदल रास्ते पर जाना मौत को दावत देना है। यहां एक रस्सी के सहारे पहाड़ की पगडंडियों पर चलना बस से बाहर है।
धाम में पोखरी (चमोली) निवासी भरत नेगी अपने बीएसएनएल के मोबाइल फोन से तीर्थयात्रियों को उनके सगे-संबंधियों से संपर्क करा रहा है। वह भी निशुल्क। भरत का कहना है कि कई तीर्थयात्री अपने परिवार को अपनी कुशलता बताते हैं। कुछ तीर्थयात्री फोन मिलते ही रोने लग जाते हैं। कुछ तो अपने घरवालों को दिलासा दिलाते हैं कि धन्य हो गए हम, जो कि इतने दिनों तक बदरीविशाल के धाम में रहने का मौका मिल रहा है।