राजस्थान के गणेशगढ़ गांव गंगानगर से केदारनाथ की यात्रा पर गया नौ सदस्यीय दल सकुशल बच निकल आया है। खौफनाक त्रासदी से बचकर वह अपने को खुश किस्मत मानते हुए बताते हैं कि ईश्वर का शुक्र है जो हमें खरोच तक नहीं लगी।
आपदा के बाद कैंप में मिल रही राहत
मदद की गुहार लगा रही थी
हम लोगों की मदद करने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन नेपाली मजदूरों ने इसी बीच खुलेआम लूटपाट मचाना शुरू कर दिया। दिल्ली की एक महिला हमसे मदद की गुहार लगा रही थी, लेकिन हमारे सामने ही तीन-चार नेपालियों ने उसका हाथ पकड़कर धक्कामार कर उसे आगे फेंक दिया और महिला बह गई।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
गंगोत्री व यमुनोत्री की यात्रा कर राजस्थान गणेशगढ़ गांव का नौ सदस्यीय दल 16 जून की सुबह 10 बजे गौरीकुंड पहुंचा। वे केदारनाथ जाना चाहते थे, लेकिन स्थानीय पुलिस ने यात्रा बंद कर दी और उन्हें आगे जाने से रोक लिया।
यात्री वेद प्रकाश, जगदीश, कांशीराम, रूकमात, अनिल, विनोद, रिंकू, सुरेंद्र व भजन लाल ने बताया कि बारिश तेज थी तो वे बहल आश्रम में रात्रि विश्राम को रुक गए। सांय 7 बजे तेज आवाज सुनाई दी, बाहर निकले तो चारों ओर नदी-नाले उफान पर थे।
ऑखों के सामने धराशाही हो गए होटल
तीन-चार होटल उनके ऑखों के सामने धराशाही हो गए। लोगों में हलचल मच गई, लोग बचाओं-बचाओं चिल्ला रहे थे। हम कुछ समझ पाते कि एक और होटल टूट गया। फिर हम लोग जान बचाकर आगे निकले।
हम रातभर बारिश में भीगते रहे। 19 जून तक हम भूखे, प्यासे रहे। एक दाना अन्न का नहीं मिला। 19 जून को शांतिकुंज हरिद्वार से कुछ लंच पैकेट पहुंचे तो जिदंगी बचने की उम्मीद जगी।
राहत व बचाव के नाम पर सरकार 4 दिनों तक कुंभकरणी नीद में सोई रही। स्वयं सेवी संस्थाएं, स्थानीय लोग व आर्मी के लोग ही मदद कर रहे हैं। ईश्वर का शुक्र है कि जो हम इस त्रासदी से सही सलामत बचकर अपने घर जा रहे हैं।