जीवन संगिनी, आठ वर्षीय बेटी और चार वर्षीय बेटा आंखों के सामने मलबे में जिंदा दफन हो गए। मुंह के अंदर पानी और मलबा घुसने से बेसुध 12 वर्षीय बेटे को दो दिन तक मुंह से आक्सीजन देता रहा। मगर, वह भी साथ छोड़ गया।
यह दुखद दास्तां है वरोला, अलीगढ़ (यूपी) के हरिओम वर्मा की, जो परिवार के साथ केदारनाथ बाबा के दर्शन के लिए गए थे। जलप्रलय ने उनके हंसते खेलते परिवार को छीन लिया। यह गम वर्मा को जिंदगी भर सालता रहेगा।
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अस्पताल में भर्ती कराया
बृहस्पतिवार सुबह फाटा से हरिओम वर्मा अपनी साली के पुत्र शुभम वर्मा के साथ एक यात्री बस से ऋषिकेश पहुंचे। तबियत बिगड़ने पर उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मौत के खौफनाक मंजर को याद कर वर्मा सिहर उठे। दर्द भरी दास्तां बताते हुए वह फफक पड़े।
केदारनाथ में आए बाढ़ के सैलाब ने उनकी पत्नी रश्मि देवी और तीन बच्चों को छीन लिया है। बकौल वर्मा 12 वर्षीय बेटे ने गोद में ही दम तोड़ा। हालात ऐसे थे कि उसके शव को भी साथ नहीं ला पाया...और बिलखने लगे। अस्पताल में मौजूद रिश्तेदारों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
मलबे में दबे हैं हरिओम के लोग
हरिओम वर्मा और उनके परिवार की तलाश में अलीगढ़ से ऋषिकेश पहुंचे बहनोई संजय वर्मा ने बताया कि उनकी साली आशा वर्मा, उसकी आठ वर्षीय बेटी प्रज्ञा, बेटा मोहित (10) और हरिओम का भांजा कपिल भी मलबे में दब गए हैं। सभी एक साथ घर से तीर्थयात्रा पर निकले थे।