उत्तराख्रंड में बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्य जोरशोर से चालू है और वहां फंसे हजारों लोगों को जैसे-तैसे निकाला जा रहा है। लेकिन इस 'पहाड़ी सुनामी' ने राज्य को इतना नुकसान पहुंचाया है, जिसकी भरपाई में अरसा लग जाएगा।
राज्य सरकार के अधिकारियों का कहना है कि उत्तराखंड में बादल फटने, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण करीब 1,100 से ज्यादा सड़कों का नामोनिशान मिट चुका है।
उत्तराखंड में तबाही का मंजर
इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में आवाजाही के लिए बेहद जरूरी माने जान वाले पुलों को भी यहां नुकसान पहुंचा है। राज्य के 94 पुल बह चुके हैं और अकेले रुद्रप्रयाग में 26 पुल गायब हो चुके हैं।
आखिर कहां गए केदारघाटी से 20 हजार लोग?
इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने में दो से तीन साल का वक्त लग जाएगा। इस बीच आईटीबीपी ने बताया कि केदारनाथ मंदिर परिसर में मौजूद सभी लोगों को बचाया जा चुका है।
देखें, बचाए गए लोगों की सूची
अब तक कुल 33,000 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 35,000 लोग अब भी अलग-अलग जगह फंसे हुए हैं।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
सरकार का यह भी कहना है कि राज्य में अलग-अलग जगह 50 बड़े भूस्खलन हुए हैं, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा बादल फटने और बाढ़ में जो कुछ रास्ते में आया, उसे साथ बहा ले गया।
गूगल की मदद से ढूंढिए लापता लोगों को
सेना, आईटीबीपी, प्राकृतिक आपदा प्रतिक्रिया दल और दूसरे लोग चौबीसों घंटे राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं।