काम है, लेकिन फिर भी सैकड़ों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। पहली नजर में ये विरोधाभासी लग सकता है, पर ये एकदम सही है। चंपावत जिले में ही निर्माण कार्य में लगे 200 से अधिक श्रमिकों का काम छूट गया है। इनमें से अधिकांश मजदूर अब बोरिया-बिस्तर बांधकर यहां से अपने-अपने घरों को चल दिए हैं।
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को न काम से निकाला गया है और नहीं उनकी छंटनी हुई है, वजह पानी का जबर्दस्त संकट है। 21 अप्रैल के बाद से चंपावत, लोहाघाट, बाराकोट, पाटी क्षेत्र के अधिकांश काम बंद हो गए हैं, जिस कारण मजदूरों की घर-गृहस्थी चल पाना कठिन हो रहा था।
वासुदेव, होरी लाल, शकुनी, पीतांबर प्रसाद, राजेश्वर सहित 200 से ज्यादा मजदूर पैसे की तंगी के चलते अपने घरों को चल दिए हैं। ये मजदूर बिहार के मोतिहारी, छपरा, दरभंगा, उप्र के बुंदेलखंड आदि इलाकों के रहने वाले हैं। मजदूर नेता भोला पासवान का कहना है कि जिले में 1700 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं।
इनमें से अब 30 प्रतिशत को भी काम नहीं मिल पा रहा है। जिस कारण मजदूर अपने घरों को या जहां काम मिलने की संभावना है, जा रहे हैं। बारिश होने के बाद वापस आएंगे।
बंद हो गए 45 भवन निर्माण
जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इन दिनों काम लटक गया है। 45 से अधिक निर्माण कार्य रुक गए हैं। रवींद्र तड़ागी, त्रिलोक सिंह, किशन जोशी, मनोज वर्मा, सुरेश जोशी, सुरेश चौधरी आदि का कहना है कि पानी की कमी से उन्होंने काम रोक दिया है। अधिकांश मकान लिंटर तक बन चुके हैं। देरी की वजह से निर्माण की लागत में भी इजाफा होगा।
हार्डवेयर से लेकर सीमेंट-सरिया की बिक्री भी गिरी
निर्माण कार्य बंद होने से बाजार पर भी असर पड़ा है। हार्डवेयर स्वामी हीरा सिंह बोहरा का कहना है कि सीमेंट, सरिया, रेत-बजरी सहित तमाम भवन निर्माण सामग्री की बिक्री में 40 प्रतिशत तक कमी आ गई है।
बढ़ता है अपराध का अंदेशा : एसपी
काम की कमी सामाजिक स्थितियों को भी प्रभावित करती है। इससे अपराध बढ़ने का खतरा भी पनपता है। पुलिस अधीक्षक दिलीप सिंह कुंवर का कहना है कि एकाएक रोजगार पर ब्रेक लगने से कई बार आपराधिक वारदातों में इजाफा भी होता है। ऐसी स्थिति पर रोकथाम के लिए पुलिस की ओर से पर्याप्त बंदोबस्त किए गए हैं।