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कर्मचारी हैं नहीं, जंगल की सुरक्षा भगवान भरोसे

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लैंसडौन के वन प्रभाग के जंगल में गश्त करते वन कर्मी। - फोटो : KOTDWAR
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बरसात में तस्करी की आशंका को लेकर संवेदनशील लैंसडौन वन प्रभाग में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। यूपी से सटी सीमा से लगे लैंसडौन वन प्रभाग के जंगलों में प्रचुर मात्रा में वन संपदा और वन्यजीव मौजूद हैं। ऐसे में बरसात में तस्करी की आशंका बनी रहती है, लेकिन, लैंसडौन वन प्रभाग में वनकर्मियों के 188 में से 78 पद रिक्त हैं। एक दरोगा के पास तीन से सेक्शन की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। ऐसे में स्टाफ की भारी कमी के चलते जंगल की सुरक्षा करना वन कर्मियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
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43327.60 हेक्टेयर वन भूमि में पांच रेंज कोटद्वार, दुगड्डा, लैंसडौन, कोटड़ीढाक और लालढांग रेंज की 56 बीटों में बड़ी संख्या में हाथी, टाइगर, गुलदार, भालू, चीतल, सांभर, हिरन आदि और बड़ी मात्रा में कीमती इमारती लकड़ी और जड़ी बूटी मौजूद है। संवेदनशील जंगलों में बाबरी तस्कर गिरोह का खतरा बना रहता है, पूर्व में कई बार बाबरी गिरोह के तस्कर पकड़े जा चुके हैं। ऐसे में वन प्रभाग में अन्य कर्मचारियों के अलावा मुख्य रूप से वन दरोगा के 16 और वन आरक्षी के 50 पद रिक्त होने के कारण जंगल की देखभाल भगवान भरोसे है।
क्या कहते हैं अधिकारी
यह बात सही है कि वन प्रभाग में कर्मचारियों की भारीकमी चल रही है। प्रभाग के पास श्रमिकों को रखने के लिए भी बजट नहीं है। इसके लिए आला अधिकारियों को लिखा गया है। वन कर्मियों को अलर्ट में रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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वैभव कुमार सिंह, डीएफओ लैंसडौन वन प्रभाग
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