दुर्घटना या अन्य किसी बीमारी से निशक्त हो चुके लोगों के लिए राजकीय मेडिकल कालेज का फिजिकल मेडिसिन एंड रिहेबिलिटेशन (पीएमएंडआर) विभाग में नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। विभाग मरीज को मेक हिम एबल (काम करने के योग्य) बनाने की दिशा में होमवर्क कर रहा है। हालांकि जरूरी संसाधन और स्टाफ की कमी इसमें अड़चन पैदा कर रही है।
मेडिकल कालेज में पीएमएंडआर विभाग लंबे समय से संचालित हो रहा है। इस विभाग को केंद्र सरकार भी वित्त पोषित करता है। अगस्त माह में विभाग में फीजियोट्रिस्ट (सहायक प्रोफेसर) डा. अभिषेक चौधरी ने बताया कि मौजूदा संसाधनों के साथ ही विभाग में निशक्तजनों के पुनर्वास की योजना बनाई जा रही है। निशक्तजन को समानता का अधिकार, रोजगार और समाज के साथ चलने का अधिकार है। पूरी योजना इसी पर निर्धारित रहेगी। उन्होंने बताया कि कई बार दुर्घटना व बीमारी में अंगों की क्षति होने या मानसिक रूप से कमजोर होने पर मरीज उम्मीद छोड़ देते हैं। विभाग में ऐसे मरीजों का एक्सरसाइज और दवाइयों से उपचार किया जाएगा।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 2.86 करोड़ निशक्तजन हैं। इसमें 20.3 फीसदी लोकोमोटर, 18.9 फीसदी बहरापन, 18.8 फीसदी दृश्यशक्ति और 5.6 फीसदी मानसिक विकलांग हैं। ग्रामीण इलाकों में शहरी क्षेत्रों से ज्यादा विकलांग हैं।
पद हैं खाली
श्रीनगर। पीएमएंडआर 01 प्रोफेसर, 01 सहायक प्रोफेसर, 02 एसआर, 01 जेआर, 02 फिजियोथेरेपिस्ट, 02आकुपेशनल थेरेपिस्ट, 01 स्पीच थेरेपिस्ट, 02 प्रोस्थेटिक एवं आर्थोटिक, 06 वर्कशाप वर्कर, 01 क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट, 01 मेडिकल सोशल वर्क, 01 रिहेब्लिटेशन नर्स, 01 वेकेशनल काउंसलर और 06 मल्टी रिहेब्लीटेशन थेरेपिस्ट के पद स्वीकृत हैं। इनमें से सहायक प्रो., फिजियोथेरेपिस्ट और एमआरटी ही तैनात हैं।
आज विशेष शिविर
विश्व निशक्तजन दिवस पर पीएमएंडआर विभाग में निशक्तजनों के लिए विशेष शिविर लगाया जाएगा। डा. चौधरी ने बताया कि शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांगता झेल रहे लोग सीधे विभाग में आ सकते हैं।