एक ओर गोवंश के संरक्षण के नाम पर तमाम दावे किए जा रहे हैं, वहीं हकीकत यह है कि गाय के जुड़वा बछड़े होने पर उसे वीरान स्थल पर छोड़ दिया गया। कारण दुधारु पशु के दो बछड़े अशुभ माने जाते हैं। हद तो यह है कि लावारिस गायों के संरक्षण के लिए स्थापित गोधाम ने भी मिश्रित नस्ल की गाय बताकर अपनाने से इंकार कर दिया। ऐसे में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की कार्यदायी कंपनी के कर्मियों और अधिकारियों ने गाय और उसके दोनों बछड़ों को शरण दी है।
मौजूदा समय में हिंदूवादी संगठन गोवंश पर हमले के प्रति आक्रामक रुख अख्तियार किए हुए हैं। वहीं गो संरक्षण के नाम पर गो कथाएं होती हैं, लेकिन जब इन मासूम पशुओं के संरक्षण की बात होती है, तो सभी गायब मिलते हैं।
दो दिन पहले सुपाणा पुल के निकट कोई अज्ञात व्यक्ति एक गाय और उसके दो बछड़े छोड़ गया। गाय के जुड़वे बच्चे होना गूढ़ मानसिकता के लोग अपशकुन मानते हैं। ऐसी गाय और बछड़ों को पहले लोग मंदिरों को दे देते थे। गाय और बछड़ों को देखकर जीवीके कर्मियों का मन पसीज गया। कर्मचारी उन्हें कार्यालय परिसर ले आए। कंपनी के साइट इंचार्ज सत्यजीत खंडूड़ी ने एजीएम कृष्णा वैंकेटा भट को यह वाकया बताया। उन्होंने तुरंत मदद की हामी भर दी। कंपनी के वर्कशॉप के निकट गाय और उसके बछड़ों के लिए शेल्टर बना दिया गया है। जहां उनको चारा-पानी दिया जा रहा है। खंडूड़ी ने बताया कि कुछ संवेदनशील लोगों ने गाय व बछड़ों को ले जाने की बात की है।