सत्रह मार्च से आंदोलन की राह पर उतरे जल निगम कर्मियों और अधिकारियों ने शुक्रवार को यहां जानकीनगर स्थित दोनों दफ्तरों पर तालाबंदी कर धरना-प्रदर्शन किया। बाद में वार्ता के बाद एक माह के लिए हड़ताल स्थगित कर दी।
धरनास्थल पर हुई सभा में चार माह से वेतन न मिलने से परेशान उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने शासन से उनके वेतन भत्तों की जिम्मेदारी लेने की मांग की है। कहा कि संगठन पेयजल निगम को राजकीयकरण की मांग लंबे समय से करता आ रहा है। शासन और सरकार की अनदेखी के चलते चार महीने से वेतन के लाले पड़ गए हैं। संगठन ने राजकीयकरण होने तक वेतन और भत्ते का शासनादेश जारी करने की मांग की है। कहा कि वार्ता के बाद भले ही एक माह के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया गया है, लेकिन मांग न माने जाने पर यह फिर से शुरू कर दिया जाएगा। धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम की अध्यक्षता एसएन त्रिपाठी ने की।
इस मौके पर ईई आरके चौहान, एमपीएस तोमर, एसपीएस देवरा, संतोष कुमार, भारत सिंह रावत, नितिन नेगी, सरिता गुप्ता, सुनीता नौटियाल, एनके चौहान, शत्रुघ्न त्यागी, शीशराम, प्रदीप बौड़ाई, योगेंद्र नाथ, सूरज मोहन भट्ट, आडीएस नेगी, जीसी ध्यानी, अंकित कंडवाल, संजीव नेगी, दीपक सिंह गुसाईं, हर्षपाल सिंह रावत, सुनीता देवी, रतन सिंह, चंद्रमोहन जखमोला, पुष्पा बिष्ट, हेमलता पांडे, कल्पना बलूनी, कुसुमलता डबराल, रामदत्त धूलिया, हरीश ध्यानी, राजेंद्र सिंह ओली, भूपेंद्र सिंह और नीरज नेगी मौजूद थे।