कोटद्वार। एक बार फिर गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी के निर्देश पर पुरातत्व विभाग की टीम ने ऐतिहासिक स्थल कण्वाश्रम और आसपास के क्षेत्र में सर्वे कर पुरातात्विक महत्व के वास्तुशिल्प के नमूनों और मूर्तियों का निरीक्षण किया। इससे पूर्व एएसआई की टीम ने वर्ष 2018 में कण्वाश्रम का दौराकर यहां मूर्तियों को शिलाखंडों की जानकारी हासिल करते हुए परीक्षण उत्खनन की अनुमति वन विभाग से मांगी थी, लेकिन तब वन विभाग की ओर से अनुमति नहीं मिल सकी थी। मामले की ठीक ढंग से पैरवी न होने के कारण तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
सांसद अनिल बलूनी के निर्देश पर बुधवार को भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद और उत्तराखंड सर्किल के प्रभारी डॉ. मोहन जोशी के नेतृत्व में टीम कण्वाश्रम पहुंची। यहां उन्होंने पुरातात्विक महत्व की शिलाओं, मूर्तियों, वास्तुशिल्प के नमूनों और पुराने बर्तन के टुकड़ों का संग्रहण एवं निरीक्षण किया। पुरातत्व दल ने मालिनी नदी के दोनों तटों का भी व्यापक निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच के बाद उन्होंने कण्वाश्रम में मिले पुरातात्विक नमूनों को 9वीं और 10वीं शताब्दी के आसपास के बताया। उन्होंने कहा कि कण्वाश्रम में परीक्षण उत्खनन एवं विस्तृत जांच के लिए उच्च अधिकारियों से पत्राचार किया जाएगा। टीम में सहायक पुरातत्वविद डाॅ. मनोज दलाल, डॉ. कविता बिष्ट, दिनेश शर्मा और गणेश नेगी आदि शामिल थे।
भाजपा के जिलाध्यक्ष राजगौरव नौटियाल और मेयर शैलेंद्र सिंह रावत ने बताया कि गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी कण्वाश्रम के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप इस क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं और इसी दिशा में उन्होंने पुरातत्व विभाग को इस क्षेत्र में कार्य करने का निर्देश दिया है। उन्होंने पुरातत्व विभाग की टीम को बताया कि कण्वाश्रम में वर्ष 2012 की बाढ़ में भूकटाव के साथ बड़ी संख्या में देव मूर्तियां, शिलाखंड व मंदिरों के अवशेष निकले थे। जो आज भी सुरक्षित रखे गए हैं।