वन विभाग और कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारी संयुक्त गश्त में जुटे
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़/कोटद्वार। मानसून सक्रिय होते ही वनों में तस्कर सक्रिय हो जाते हैं। वनों और वन्य जीवों को तस्करों से बचाने के लिए वन विभाग और कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। कार्बेट अंचल में पहली बार दोनों विभागों ने संयुक्त गश्त शुरू कर दी है।
बरसात शुरू होते ही कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों एवं वन्यजीवों को तस्करों से सुरक्षित रखना टाइगर रिजर्व अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। बारिश के कारण वनों में पानी भर जाता है। ऐसे में वन्यजीव सुरक्षित स्थानों की तलाश में आश्रय स्थल खोजते हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व का जंगल उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की सीमा से लगा है। पाखरो से धारा तक का जंगल इसी सीमा पर है। कोटद्वार एवं रामनगर की सीमाएं कार्बेट के घेरे में ही हैं। अक्सर यहां से बाहरी लोग वनों में प्रवेश करते हैं। बरसात में सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं जिससे आम गश्त कठिन हो जाती है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पांडेय ने कहा कि पहली बार कार्बेट टाइगर रिजर्व के साथ अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, कोटद्वार वन प्रभाग, लैंसडौन वन प्रभाग, तराई के वन प्रभाग व सीमा पर लगे वन प्रभाग संयुक्त गश्त कर रहे हैं। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त की जा रही है। स्वयं भी गश्त के लिए जा रहा हूं।