गढ़वाल मंडल में राज्य संरक्षित और संरक्षणाधीन मंदिर भगवान भरोसे हैं। मंडल में 32 राज्य संरक्षित और संरक्षणाधीन मंदिरों में से 30 मंदिरों का बजट के अभाव में ठीक से अनुरक्षण भी नहीं हो पा रहा है।
पुरातात्विक महत्व को देखते हुए शासन की ओर से गढ़वाल मंडल में 21 मंदिरों को सरकार ने अपने संरक्षण में लिया है। छठी -सातवीं शताब्दी से लेकर 17 वीं-18 वीं शताब्दी के बीच बने ये मंदिर वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं। इनमें सूर्य, विष्णु, पार्वती, गणेश, उमा महेश, कार्तिकेय समेत कई देवी- देवताओं की पुरातात्विक महत्व की कई बेशकीमती मूर्तियां भी हैं।
मंडल में राज्य संरक्षित एवं राज्य संरक्षणाधीन मंदिरों में सिर्फ रुद्रप्रयाग के नारायणकोटी मंदिर और पैठाणी के शिव मंदिर में चौकीदार तैनात हैं। इन मंदिरों के अनुरक्षण के लिए शासन मात्र पांच लाख देता है। इससे सभी मंदिरों की सफाई और अनुरक्षण कार्य नहीं हो पाता है। इस साल तो इस मद में विभाग को मात्र 2.55 लाख की राशि ही रिलीज हुई हैं।
गढ़वाल मंडल में राज्य संरक्षित मंदिर
पौड़ी जनपद
वैष्णव मंदिर समूह देवल, देवलगढ़ मंदिर समूह देवलगढ़, शिव मंदिर पैठाणी, शिवालय कुखड़ गांव, लक्ष्मीनारायण मंदिर समूह सुमाड़ी
रुद्रप्रयाग जनपद
नारायणकोटी मंदिर समूह नारायणकोटी, नालाचट्टी मंदिर समूह एवं स्तूप, दमयंती मंदिर ह्यूण, लक्ष्मी नारायण मंदिर समूह बैरागणा।
चमोली जनपद
वैतरणी मंदिर समूह गोपेश्वर, गोविंद मंदिर समूह सिमली, कुलसारी मंदिर समूह कुलसारी, नारायण मंदिर समूह देवराड़ा।
टिहरी जनपद
सूर्य मंदिर समूह पलेठी, राज राजेश्वरी मंदिर रानीहाट, नंदा देवी मंदिर समूह बजिंगा।
उत्तरकाशी जनपद
क्यार्क रैथल मंदिर समूह, जमदग्नि मंदिर समूह थान, महासू मंदिर समूह बड़कोट, महासू मंदिर समूह पुजेली, देवराणा मंदिर पौंटी।
-गढ़वाल मंडल में राज्य संरक्षणाधीन मंदिर
पौड़ी जनपद-
नगर गांव के मंदिर कल्जीखाल, दानड़ी मंदिर समूह।
रुद्रप्रयाग जनपद-
शिवालय महड़, चंडिका मंदिर समूह भणज, कर्णधार शिवालय, सिल्सा मंदिर समूह, बसुकेदार मंदिर समूह, कंडारा मंदिर समूह कंडारा, फलासी मंदिर समूह फलासी।
चमोली जनपद-
अनुसूया मंदिर समूह चमोली, तपोवन मंदिर समूह तपोवन।
कोट-
राज्य संरक्षित और संरक्षणाधीन मंदिरों के पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इनमें चौकीदार की तैनाती करने, मंदिरों के अनुरक्षण के लिए अतिरिक्त बजट की व्यवस्था के लिए शासन को लिखा जा चुका है। शासन से स्वीकृति नहीं आ पाई है। -आशीष कुमार क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी पौड़ी गढ़वाल