वन सीमा से सटे सनेह पट्टी के ग्रामीणों की कुंभीचौड़ में हुई बैठक में वन विभाग से वन्यजीवों के आतंक से निजात दिलाने की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने कहा कि सनेह पट्टी के गांवों के किनारे वन विभाग की कंटीले बांस और मधुमक्खी पालन योजना भी हाथियों को नहीं रोक पा रही है। रात को हाथी के झुंड गेहूं की फसल रौंद रहे हैं। कहा कि वन विभाग यदि अधूरी छोड़ गई हाथी सुरक्षा दीवार को पूरा बनवा दे तो हाथियों से फसल की सुरक्षा की जा सकती है।
संयुक्त समाज सेवी संगठन सनेह पट्टी के बैनर तले सोमवार को रामलीला मंच कुंभीचौड़ में हुई ग्रामीणों की बैठक में वन्यजीवों के बढ़ते आतंक पर चिंता जताई गई। संगठन के अध्यक्ष रतन सिंह नेगी, महासचिव वाचस्पति बहुखंडी और मोहन सिंह रावत ने कहा कि ग्रास्टनगंज से सनेह तक के सभी गांवों कुंभीचौड़, रतनपुर, रामपुर और लालपानी में ग्रामीण वन्यजीवों से इतने परेशान हैं कि खेती किसानी छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। वन विभाग ने वन सीमा से सटे गांवों के किनारे पहले कटीले बांस लगाए और बाद में मधुमक्खी के दो सौ बक्से बांटकर मधुमक्खी पालन भी करवाया, लेकिन हाथी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। काश्तकार हाथी और बंदरों से सबसे ज्यादा परेशान हैं। खेती उपजाऊ होने के बावजूद किसान खेती छोड़ने को मजबूर होने लगे हैं।
बैठक में रवीद्र सिंह रावत, मुकेश देवरानी, एमएस रावत, जसपाल सिंह, रणजीत सिंह, सुदर्शन कोटनाला, त्रिलोक सिंह, अनुसूया प्रसाद, गणेश अधिकारी, चंद्रमणि, प्रदीप बलूनी और प्रेम सिंह रावत मौजूद थे।
रामपुर और रतनपुर में झूलते बिजली के तार खतरनाक
सनेह के ग्रामीणों ने रामपुर और रतनपुर में खेतों के ऊपर झूलते बिजली के तारों को वन्यजीवों खासकर हाथियों के लिए जानलेवा बताया। कहा कि करंट की चपेट में हाथी आ सकते हैं। डीएफओ एनएम त्रिपाठी ने एसडीओ को मामले की जांचकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।