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नगर पालिका दुगड्डा: निकाय तो बनी, पर नहीं बदली सूरत

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दुगड्डा (कोटद्वार)। चार वार्डों वाली दुगड्डा नगर पालिका में समस्याएं लोगों को परेशान कर रही हैं। पालिका के पास स्वयं का ट्रंचिंग ग्राउंड तक नहीं है। जिससे कूड़ा निस्तारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आज भी इस पालिका में चार वार्ड ही हैं।



करीब डेढ़ वर्ग किमी में फैली दुगड्डा नगर पालिका की आबादी करीब तीन हजार के आसपास है। यहां चार वार्ड क्रमश: धनीराम बाजार वार्ड, कमला नेहरू मार्ग वार्ड, मोती बाजार वार्ड, सुभाष बाजार वार्ड, शामिल हैंं। पालिका के गठन के 78 सालों बाद भी यहां समस्याएं जस की तस हैं। नगर की सफाई व्यवस्था खस्ताहाल है। ट्रंचिंग ग्राउंड नहीं होने के कारण नदियों के किनारों को कचरे के डंपिंग जोन के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
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वार्ड नंबर एक धनीराम बाजार स्थित चूना धारा दुगड्डा का प्रवेश स्थल माना जाता है। यहां प्राकृतिक स्रोत का पानी पीकर पर्यटक व यात्री प्यास बुझाते हैं, यह भी खस्ताहाल है। नगर में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है। जिससे पर्यटक सीजन में वाहनों की अधिकता से जाम की स्थिति बनी रहती है। पालिका क्षेत्र में सेना की भूमि में लैंटाना की झाड़ी उगने से नगर में गुलदार समेत अन्य जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है। नगर में सुलभ शौचालयों का अभाव है। गांधीचौक स्थित शौचालय को भी ध्वस्त कर दिया गया है। जिससे यात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।



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दुगड्डा पौड़ी जनपद की प्राचीन व्यावसायिक मंडी रही है। यहां पर सिलगाड नदी में कृत्रिम झील का निर्माण कर पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है।



- प्रीतम नेगी, निवासी मोती बाजार वार्ड। (फोटो)

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पालिका क्षेत्र में वाहनों की पार्किंग की सुविधा नहीं है। जिससे पर्यटक यहां पर रुक नहीं पाते हैं। पार्किंग उपलब्ध होने पर बाजार में पर्यटन रुकेंगे तो व्यवसाय भी बढ़ेगा।
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- विजय पसपोला, निवासी मोती बाजार वार्ड। (फोटो)



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नगर में व्यापार चौपट होता जा रहा है। दुगड्डा में दो नदियों का संगम है, लेकिन पर्यटन योजनाएं नहीं हैं। पर्यटकों के ठहराव के लिए योजनाएं बननी चाहिए।



- विपिन गर्ग, निवासी सुभाष बाजार वार्ड। (फोटो)

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नगर पालिका की ओर से वाचनालय की व्यवस्था की जानी चाहिए। शहर में सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

- मो. मोनीस अहमद, निवासी धनीराम बाजार वार्ड। (फोटो)



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खुद में स्वर्णिम इतिहास संजोए है दुगड्डा



दुगड्डा का इतिहास स्वर्णिम रहा है। यहां आजादी की लड़ाई के लिए जहां हरि राम मिश्र चंचल, उमराव सिंह रावत, लल्लू मल, भीष्म चंद्र और उनके साथियों ने आजादी का बिगुल फूंका। वहीं, दिल्ली के चांदनी चौक में गडोदिया स्टोर लूटकांड के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए जुलाई, 1930 में चंद्रशेखर आजाद अपने साथियों रामचंद्र, विशंबर दयाल, हजारी लाल, छैल बिहारी के साथ अपने आंदोलनकारी साथी स्व. भवानी सिंह रावत के यहां नाथूपुर गांव आए थे। यहां उन्होंने सात दिनों तक सशस्त्र प्रशिक्षण लिया था। उत्तराखंड के महान इतिहासकार शिव प्रसाद डबराल चारण ने भी यहां के इतिहास पर अपनी कई रचनाएं लिखी थीं। ब्रिटिश शासनकाल में दुगड्डा गढ़वाल की प्रमुख व्यापारिक मंडी हुआ करती थी। यहां के व्यापारी पौड़ी जनपद के साथ ही चमोली जनपद में हर्षिल और नीति माणा तक व्यापार करते थे। 1906 में लंगूरगाड नदी में आई भीषण बाढ़ से सुभाष बाजार और धनीराम बाजार में खासी तबाही हुई थी। उसके बाद मंडी को कोटद्वार शिफ्ट कर दिया गया।
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