मंडल मुख्यालय के वनगढ़स्यू पट्टी की बालमणा ग्रामसभा के लोग बंदरों के आतंक से परेशान हैं। बंदर न सिर्फ फसलों को बर्बाद कर रहे हैं बल्कि राहगीरों के ऊपर हमला करके उन्हें घायल कर रहे हैं। बंदरों को लेकर स्कूली बच्चों में भी खौफ बना हुआ है।
घुड़दौड़ी और जामलाखाल के बीच बंदरों का सबसे अधिक आतंक है। डीएफओ रमेेश चंद्रा ने कहा कि बंदरों को पकड़वाने के लिए जल्द ही पिंजरा लगवाएंगे। इनको चिड़ियापुर भेजेंगे या फिर किसी घने जंगलों में शिफ्ट करा देंगे।
ग्राम प्रधान ललित सिंह रावत ने बताया कि पिछले सप्ताह वे घुड़दौड़ी से जामलाखाल की ओर आ रहे थे बीच सड़क पर बैठे बंदर उनके ऊपर झपट पड़े थे। उन्होंने शोर मचाकर बंदरों को भगाया और वहां बमुश्किल निकल आए। उन्होंने बताया कि ग्रामसभा भदला निवासी दर्शनी देवी पत्नी उर्वीदत्त को बंदरों ने काट दिया था।
इसके अलावा छात्र-छात्राओं के स्कूल-कालेज आते-जाते भय बना हुुआ है। बंदर कई छात्रों को काटकर चोटिल कर चुके हैं। उन्होंने वन विभाग से बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। उधर, पाबौ ब्लाक के सैंजी, बुरांसी, चपलोड़ी, बरसुडी, मिलई, धुलत, सकनियाणा में जंगली जानवरों के आतंक से काश्तकारों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल काश्तकारों नंदराम पोखरियाल, दिगंबर प्रसाद, भूपेंद्र रावत, प्रवीन रावत, सोबन सिंह भंडारी, बिक्रम भंडारी, सत्यप्रसाद खंकरियाल का कहना है कि क्षेत्र में सुअरों एवं बंदरों द्वारा उनकी फसलों को नष्ट कर दिया जाता है।
वन विभाग से कई बार सुअरों और बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से जंगली जानवरों की समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।